बेंगलुरु , जून 26 -- केंद्रीय मंत्री एवं जनता दल (एस) नेता एचडी कुमारस्वामी ने शुक्रवार को कहा कि प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट के लिए ज़मीन का अधिग्रहण अनिच्छुक किसानों पर ज़बरदस्ती नहीं किया जाना चाहिए।
श्री कुमारस्वामी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि प्रस्तावित टाउनशिप प्रोजेक्ट से प्रभावित ज़्यादातर किसान अपनी ज़मीन देने को तैयार नहीं हैं, जबकि इस आंदोलन को 470 दिन हो चुके हैं। उन्होंने कर्नाटक सरकार के उस दावे पर भी सवाल उठाया जिसमें कहा गया है कि 20 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले इस प्रोजेक्ट के लिए मुआवज़े के तौर पर सिर्फ़ 19 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
उन्होंने कहा, "अगर सभी किसान अपनी मर्ज़ी से ज़मीन देने को तैयार हों, तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन उन पर ज़बरदस्ती या दबाव नहीं डाला जाना चाहिए। ऐसे मुद्दों को बातचीत और आपसी समझ से सुलझाया जाना चाहिए।" उन्होंने यह भी कहा कि वे किसानों का समर्थन कर रहे हैं क्योंकि किसानों ने लगभग दो महीने पहले उनसे मदद मांगी थी।
श्री कुमारस्वामी ने कहा कि बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट को लेकर उनका रुख न तो इसके पक्ष में था और न ही इसके खिलाफ; उनकी बस यही चिंता थी कि प्रभावित किसानों की इच्छाओं का सम्मान किया जाये। उन्होंने राज्य सरकार से टकराव की स्थिति बनाने के बजाय किसानों से बातचीत करने की अपील की।
केंद्रीय मंत्री ने सरकार की मुआवज़ा प्रक्रिया पर भी सवाल उठाये। उन्होंने कहा कि 20 हजार करोड़ रुपये के अनुमानित खर्च वाले इस प्रोजेक्ट के लिए सरकार ने सिर्फ़ 19 करोड़ रुपये का मुआवज़ा देने का दावा किया है। उन्होंने पूछा, "20 हजार करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट के लिए, वे कहते हैं कि मुआवज़े के तौर पर सिर्फ़ 19 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इस रफ़्तार से यह प्रक्रिया पूरी होने में कितना समय लगेगा?"श्री कुमारस्वामी ने माना कि जिन गांवों में खेती करना मुश्किल हो गया था, वहां शायद मुआवज़ा दिया गया हो, लेकिन उन्होंने कहा कि ऐसे इक्का-दुक्का मामलों के आधार पर सभी किसानों की व्यापक सहमति के बिना ज़मीन का अधिग्रहण करना सही नहीं ठहराया जा सकता।
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