बैतूल , जुलाई 28 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में विशेष अनुदान के तहत चल रहे विद्युत लाइन विस्तार एवं बिजली पोल स्थापना कार्य की गुणवत्ता को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग की है। आरोप है कि कार्य में तकनीकी मानकों की अनदेखी कर घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, जिससे भविष्य में बिजली आपूर्ति की सुरक्षा और परियोजना की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार विद्युत पोलों के निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। उनका आरोप है कि जिन लोहे के पोलों का वजन लगभग 408 किलोग्राम होना चाहिए, उनकी जगह करीब 350 किलोग्राम वजन वाले पोल लगाए जा रहे हैं। इसी प्रकार प्रति मीटर पोल का वजन लगभग 37.1 किलोग्राम के बजाय 32 से 33 किलोग्राम होने का दावा किया गया है। लोगों का कहना है कि वर्तमान में लगाए जा रहे पोलों की तुलना थाना परिसर के सामने लगे पुराने पोलों से करने पर उनकी मोटाई, ऊंचाई और मजबूती में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।
आरोप है कि केबल सपोर्ट पोल तथा उनके कंक्रीट फाउंडेशन में भी गुणवत्ता संबंधी मानकों का पालन नहीं किया जा रहा। निर्धारित आकार, गहराई और गुणवत्ता की कंक्रीट का उपयोग किए बिना कई स्थानों पर पोल स्थापित किए गए हैं, जिससे भविष्य में उनकी स्थिरता और सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका है।
स्थानीय लोगों ने ट्रांसफार्मर स्ट्रक्चर में प्रयुक्त स्टील चैनलों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जहां एक सेट का कुल वजन लगभग 50 किलोग्राम होना चाहिए, वहां करीब 30 किलोग्राम वजन की सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। उनका आरोप है कि यदि जांच में यह तथ्य सही पाए जाते हैं तो यह तकनीकी एवं वित्तीय अनियमितता का मामला हो सकता है।
ट्रांसफार्मरों की अर्थिंग व्यवस्था को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि सुरक्षा मानकों के अनुसार अर्थिंग पाइप लगभग 10 फीट गहराई तक डाला जाना चाहिए, लेकिन कई स्थानों पर इसे केवल चार फीट तक ही स्थापित किया गया है, जिससे विद्युत दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।
स्थानीय नागरिकों ने लगाए गए पोलों के वास्तविक वजन, केबल पोल एवं फाउंडेशन की गुणवत्ता, ट्रांसफार्मर स्ट्रक्चर में प्रयुक्त सामग्री तथा अर्थिंग पाइप की गहराई की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। साथ ही उपयोग की गई सामग्री स्वीकृत विक्रेताओं से खरीदी गई है या नहीं, इसकी भी जांच कराने, एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला की परीक्षण रिपोर्ट एवं गुणवत्ता प्रमाणपत्र सार्वजनिक करने तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार और अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
इस संबंध में मध्यप्रदेश विद्युत मंडल के डीजीएम (एसटीएम) हाकिम सिंह बाथम ने कहा कि विभाग मामले की जांच कर रहा है। उन्होंने बताया कि संबंधित अधिकारियों को एक-दो दिन में पत्र भेजा जाएगा और वह स्वयं भी मौके पर पहुंचकर पूरे मामले का निरीक्षण करेंगे।
इस बीच जिले के आदिवासी बहुल भीमपुर विकासखंड के मोहटा में निर्माणाधीन बिजली सबस्टेशन में भी अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वहां कई बिजली पोल पर्याप्त कंक्रीट फाउंडेशन के बजाय मिट्टी के सहारे खड़े किए गए हैं, जिससे पहली ही बारिश में कुछ पोल तिरछे होने लगे हैं। उन्होंने जिले में चल रहे सभी विद्युत निर्माण कार्यों का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट कराने की मांग की है।
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