लखनऊ , मई 30 -- उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने बिजली उपभोक्ताओं पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज लगाए जाने के निर्णय का विरोध करते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई से जूझ रही जनता पर यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना जनहित के विपरीत है।
अजय राय ने शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर कहा कि कांग्रेस पार्टी आम जनता और किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है तथा बिजली दरों में वृद्धि के इस निर्णय का विरोध करती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता पहले से ही पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की बढ़ती कीमतों से परेशान है। ऐसे समय में जून 2026 से बिजली बिलों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज लागू करना आम उपभोक्ताओं और किसानों की आर्थिक स्थिति को और कठिन बना देगा।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार एक ओर 24 घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में बिजली कटौती, ट्रांसफार्मर खराब होने, फीडर फेल होने और आपूर्ति बाधित रहने जैसी समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि राजधानी की स्थिति यह है तो ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की परिस्थितियों का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग का उद्देश्य उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है, लेकिन बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों, स्मार्ट मीटर विवादों और वितरण कंपनियों की कार्यप्रणाली को लेकर अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी है।
अजय राय ने कहा कि प्रदेश में बिजली संकट, अघोषित कटौती, वितरण व्यवस्था की खामियों और स्मार्ट मीटर विवादों के बीच बिजली दरों पर अतिरिक्त भार डालना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) द्वारा प्रस्तावित फ्यूल सरचार्ज वृद्धि का सीधा असर उपभोक्ताओं के मासिक बजट पर पड़ेगा।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि सरकार केवल दावों और घोषणाओं तक सीमित न रहे, बल्कि विद्युत व्यवस्था में वास्तविक सुधार, जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करे। साथ ही व्यापक जनहित को देखते हुए 10 प्रतिशत अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज लगाने के निर्णय को तत्काल वापस लेकर आम जनता और किसानों को राहत प्रदान करे।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि भीषण महंगाई के दौर में बिजली शुल्क में अतिरिक्त वृद्धि आम नागरिकों पर एक और करारा आर्थिक प्रहार साबित होगी, जिसे किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।
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