चंडीगढ़ , जनवरी 28 -- बिजली क्षेत्र के निजीकरण और बिजली संशोधन विधेयक के खिलाफ बिजली इंजीनियरों ने 12 फरवरी को राज्यव्यापी प्रदर्शन की घोषणा की है।
आल इंडिया पॉवर इंजीनियर एसोसिएशन ( एआईपीईएफ ) के महासचिव अजयपाल अटवाल ने कहा कि यह आंदोलन देश के लाखों बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं में व्याप्त उस गहरे आक्रोश और चिंता की अभिव्यक्ति है, जो सार्वजनिक बिजली क्षेत्र को कमजोर करने वाली नीतियों के खिलाफ लगातार बढ़ती जा रही है।
एआईपीईएफ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि संसद के बजट सत्र के दौरान इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को पेश किया गया, तो देशभर के बिजली अभियंता एवं कर्मचारी तत्काल 'लाइटनिंग एक्शन' शुरू करेंगे, जिसमें कार्यस्थल छोड़कर व्यापक जन-आंदोलन शामिल होगा। उन्होंने कहा कि बिजली देश की अर्थव्यवस्था, कृषि, उद्योग और ग्रामीण जीवन की रीढ़ है। इलेक्ट्रिसिटी (संशोधन) बिल 2025 और राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 सस्ती बिजली, सार्वजनिक स्वामित्व, संघीय ढांचे और राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा हमला हैं।
एआईपीईएफ ने केंद्र सरकार द्वारा थोपे जा रहे आक्रामक निजीकरण का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि वितरण में मल्टी-लाइसेंसिंग, जबरन स्मार्ट मीटरिंग, ट्रांसमिशन में पीपीपी एवं टीबीसीबी मॉडल, संचालन का आउटसोर्सिंग और नौकरियों का ठेकेदारीकरण बिजली क्षेत्र को अस्थिर कर रहा है। फेडरेशन ने चंडीगढ़ के विफल निजीकरण मॉडल का हवाला देते हुए उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम), राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों में इसी तरह के प्रयोगों के गंभीर परिणामों की चेतावनी दी।
एआईपीईएफ की प्रमुख मांगें है कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को तत्काल वापस लिया जाए, जो निजीकरण और मल्टी-लाइसेंसिंग को बढ़ावा देता है, क्रॉस-सब्सिडी समाप्त करता है, बिजली दरें बढ़ाता है और मुनाफे वाले उपभोक्ताओं को निजी कंपनियों को सौंपने का रास्ता खोलता है। शांति अधिनियम 2025 को वापस लिया जाए, जो परमाणु सुरक्षा और जवाबदेही को कमजोर कर निजी एवं विदेशी पूंजी के लिए द्वार खोलता है। राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 को रद्द किया जाये, जो उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण-तीनों क्षेत्रों में निजीकरण को आक्रामक रूप से आगे बढ़ाती है।
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