यमुनानगर , अक्टूबर 20 -- हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन द्वारा गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी 'इलेवन पावर' को बिजली वितरण के लिए पैरेलल लाइसेंस देने के फैसले के विरोध में मंगलवार को प्रदेश भर में विरोध प्रदर्शन हुए।
हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉयीज एंड इंजीनियर्स जॉइंट फोरम' के आह्वान पर कर्मचारियों ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और कमीशन के अध्यक्ष मुकेश गर्ग के पुतले फूंके। हिसार, कैथल, पिहोवा, रेवाड़ी और पंचकूला सहित कई शहरों में विरोध रैलियां निकाली गईं।
जॉइंट फोरम के नेता रविंदर घनघस ने बताया कि फोरम ने इस फैसले के विरोध में 22 से 24 अक्टूबर तक तीन दिन की राज्यव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। उन्होंने कमीशन के इस फैसले को हरियाणा के बिजली क्षेत्र के इतिहास में 'काला दिन' करार दिया।
फोरम का आरोप है कि कमीशन ने सरकार के इशारे पर गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को पैरेलल लाइसेंस दिया है। यह फैसला जन-विरोधी और कर्मचारी-विरोधी है। अधिक मुनाफे और ज्यादा राजस्व वाले क्षेत्रों को निजी हाथों में सौंपकर सरकारी कंपनी दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम को कमजोर करने की साजिश रची जा रही है।
जॉइंट फोरम की ओर से जारी बयान में बलजीत बेनीवाल ने कहा कि यह हरियाणा के बिजली क्षेत्र का अप्रत्यक्ष निजीकरण है। इससे प्रदेश भर के बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों में भारी आक्रोश है। फोरम का आरोप है कि राज्य सरकार और आयोग मिलकर सरकारी बिजली कंपनियों को निजी हाथों में सौंपने की साजिश रच रहे हैं। ज्यादा राजस्व देने वाले औद्योगिक और व्यावसायिक केंद्रों को निजी कंपनी को सौंपना सरकारी बिजली कंपनी को पंगु बनाने की कोशिश है। ऐसी भी खबरें हैंकि सरकार निकट भविष्य में चार अन्य जिलों को भी एक बड़े उद्योगपति को सौंपने की योजना बना रही है।
मीडिया सलाहकार वी. के. गुप्ता ने बताया कि ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन और नेशनल कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉयीज एंड इंजीनियर्स मिलकर गुरुग्राम और नूंह के लिए दिए गए समांतर लाइसेंस के खिलाफ निर्णायक कदम उठाने के लिए तैयार हैं। फेडरेशन, हरियाणा पावर एम्प्लॉयीज एंड इंजीनियर्स जॉइंट एक्शन कमेटी केफैसलों का पूरा समर्थन करता है।
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