भोपाल , अगस्त 10 -- मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर एवं चंबल संभाग के 16 जिलों के बिजली उपभोक्ताओं से साइबर जालसाजों से सावधान रहने और बिजली बिलों का भुगतान केवल अधिकृत माध्यमों से करने की अपील की है।

कंपनी ने बताया कि उपभोक्ता बिजली बिल का नगद भुगतान कंपनी के जोन, वितरण केंद्र कार्यालय, पीओएस मशीन अथवा अधिकृत भुगतान केंद्रों जैसे एमपी ऑनलाइन और कॉमन सर्विस सेंटर पर कर सकते हैं। कैशलेस भुगतान के लिए कंपनी के पोर्टल, नेट बैंकिंग, क्रेडिट-डेबिट कार्ड, यूपीआई, ईसीएस, बीबीपीएस, कैश कार्ड एवं वॉलेट के अलावा फोन पे, अमेजन पे, गूगल पे, पेटीएम, व्हाट्सएप पे और उपाय मोबाइल एप की सुविधा भी उपलब्ध है।

कंपनी के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि असमय विद्युत विच्छेदन से बचने के नाम पर कंपनी किसी निजी मोबाइल नंबर से कॉल कर भुगतान करने के लिए एसएमएस या व्हाट्सएप संदेश जारी नहीं करती। कंपनी के एसएमएस केवल सीसीएमपीसीजेड और व्हाट्सएप संदेश केवल 0755-2551222 सेंडर आईडी से भेजे जाते हैं। उपभोक्ताओं को किसी अन्य सेंडर आईडी अथवा निजी मोबाइल नंबर से आने वाले भ्रामक संदेशों से सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

कंपनी ने बताया कि बिजली बिल के भुगतान के लिए उपभोक्ता पहचान नंबर यानी आईवीआरएस नंबर की जरूरत होती है। इसी नंबर के आधार पर जोन, वितरण केंद्र या अधिकृत भुगतान माध्यमों के जरिए बिल का भुगतान किया जाता है। उपभोक्ताओं से कहा गया है कि किसी अनजान मोबाइल नंबर से आए फोन या व्हाट्सएप संदेश के आधार पर किसी मोबाइल नंबर पर बिल की राशि हस्तांतरित नहीं करें और अपना पिन नंबर भी किसी के साथ साझा नहीं करें।

कंपनी के संज्ञान में आया है कि साइबर जालसाज बिजली उपभोक्ताओं को एसएमएस, व्हाट्सएप संदेश अथवा आईवीआर तकनीक से फोन कर कुछ नंबर दबाने के लिए कहते हैं। बिजली कनेक्शन कुछ घंटों में काटने का भय दिखाकर विशेष नंबर दबाने, अनजान लिंक या एप पर क्लिक करने अथवा संपर्क कर बकाया राशि जमा कराने के लिए कहा जाता है। कंपनी ने ऐसे संदेशों और कॉल को फर्जी बताते हुए इन पर ध्यान नहीं देने की अपील की है।

कंपनी ने कहा है कि साइबर फ्रॉड की किसी भी घटना की सूचना तत्काल भारत सरकार की हेल्पलाइन 1930 पर दर्ज कराई जाए। कंपनी ने यह भी बताया कि यदि किसी अनजान नंबर से बिजली संबंधी कार्य के लिए फोन आता है तो उपभोक्ता संबंधित व्यक्ति से उसका कर्मचारी आईडी पूछें। इसके बाद यूपीएवाई एप के होम पेज पर 'अदर सर्विस' में उपलब्ध 'एम्पलॉय वैरिफिकेशन' विकल्प के जरिए कर्मचारी आईडी दर्ज कर उसका सत्यापन किया जा सकता है। अधिकृत कर्मचारी यूपीएवाई एप में पंजीकृत हैं। सत्यापन के बाद ही किसी व्यक्ति को कंपनी का अधिकृत कर्मचारी मानने और किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत या बैंकिंग जानकारी साझा करने की सलाह दी गई है।

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