अंकारा , जुलाई 07 -- उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के महासचिव मार्क रट ने मंगलवार को कहा कि यह गठबंधन रक्षा एवं घरेलू उत्पादन में तेजी से निवेश बढ़ा रहा है जिससे बाहर के आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम की जा सके।

श्री रट ने यहां आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन की शुरुआत करते हुए कहा कि हेग में आयोजित सम्मेलन में गठबंधन सदस्यों ने 2035 तक रक्षा-संबंधी व्यय को अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के पांच प्रतिशत तक बढ़ाने का वादा किया था। उन्होंने कहा कि पूरे यूरोप के उद्योग अमेरिकी कंपनियों के साथ मिलकर नवाचार और अगली पीढ़ी के हथियारों के विकास में योगदान दे रहे हैं।

उन्होंने कहा, "ये ऐसे हथियार हैं जो सही मायने में 'मेड इन नाटो' हैं। ये सिर्फ एक देश में नहीं, बल्कि कई देशों के सहयोग से तैयार हो रहे हैं। हम ऐसे ही अपने गठबंधन को मजबूत बनाते हैं। हम ऐसे ही आज और आने वाले कल में अपने एक अरब लोगों तथा अपनी एक-एक इंच ज़मीन की सुरक्षा करते हैं।"श्री रट का बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार नाटो सदस्यों से रक्षा व्यय बढ़ाने तथा गठबंधन की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने में ज्यादा जिम्मेदारी लेने की मांग कर चुके हैं। श्री ट्रंप ने रक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियों को पूरा न कर पाने के लिए लगातार गठबंधन के साझेदारों की आलोचना की है। वह विशेषकर यूरोपीय देशों के आलोचक रहे हैं। उनका कहना है कि यूरोपीय देशों को महाद्वीप की रक्षा के लिए ज्यादा जिम्मेदारी लेने की जरूरत है, न कि अमेरिका पर जरूरत से ज्यादा निर्भर रहने की।

डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडेरिकसन ने नाटो प्रमुख की टिप्पणी का समर्थन करते हुए कहा कि डेनमार्क नाटो के खर्च संबंधी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सही राह पर आगे बढ़ रहा था। उन्होंने यूरोपीय देशों से अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने का आह्वान किया। सुश्री फ्रेडेरिकसन ने कहा, "यूरोप को खुद को हथियारबंद करना होगा ताकि हम अपने लोगों एवं अपने समाज की रक्षा कर सकें। डेनमार्क अपना काम कर रहा है।" उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि रूस का संभावित हमला यूरोपीय सुरक्षा के लिए खतरा है। उन्होंने कहा , " यूक्रेन का समर्थन करते रहना बेहद अहम है। यह सभी को स्पष्ट होना चाहिए कि यूक्रेन के लोग हमारी सुरक्षा एवं आजादी की भी रक्षा कर रहे हैं। वे इस युद्ध को सिर्फ शब्दों से नहीं जीत सकते।"इस बीच रूस ने लगातार यूरोप पर हमला बोलने की अटकलों से इनकार किया है और यूरोपीय नेताओं पर लोगों को डराने का आरोप लगाया है, ताकि वे अपनी असफलताओं को छिपा सकें।

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