पटना , जून 04 -- बिहार की पंचायतों में महिला जनप्रतिनिधि और जीविका दीदियां बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। समय पर मिली सूचना और त्वरित हस्तक्षेप से कई मामलों में बाल विवाह रुकवाए गए हैं, जिससे सैकड़ों किशोरियों का भविष्य सुरक्षित हुआ है। राज्य में यह जमीनी मुहिम लगातार मजबूत हो रही है और इसका असर ग्रामीण इलाकों में साफ दिखाई दे रहा है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6) के अनुसार बिहार में अभी भी 34.6 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 वर्ष से पहले हो जाती है, हालांकि पिछले वर्षों की तुलना में इसमें कमी दर्ज की गई है। गरीबी, अशिक्षा और सामाजिक दबाव इस समस्या के प्रमुख कारण बने हुए हैं।

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