बालाघाट , सितंबर 15 -- मध्यप्रदेश में बालाघाट जिले के आदिवासी बाहुल्य गांवों में बच्चों की मौत के मामले को लेकर कांग्रेस ने मंगलवार को न्याय यात्रा निकालकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ता रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे और ज्ञापन सौंपा। इससे पहले अंबेडकर चौक पर सभा आयोजित की गई, जिसमें श्री पटवारी, आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया सहित कांग्रेस विधायकों ने संबोधित किया।
श्री भूरिया ने कहा कि वह 20 अगस्त को बालाघाट पहुंचे थे और पीड़ित वर्ग से मिले थे। उस समय सरकार मौत के आंकड़ों को मानने के लिए तैयार नहीं थी और सहायता राशि भी महज 20 हजार रुपये दी गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि बाहरी इन्फ्लुएंसरों ने आदिवासी सभ्यता को बच्चों की मौत से जोड़कर समाज को बदनाम करने का काम किया। उन्होंने बालाघाट के पत्रकारों के काम की सराहना करते हुए कहा कि भोपाल से इन्फ्लुएंसरों को भेजने की जरूरत नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लाशों की राजनीति करती है और सच को झूठ साबित करने का काम करती है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री पटवारी ने कहा कि बालाघाट में 32 बच्चों की मौत सरकार की अकर्मण्यता और अधिकारियों के अहंकार का परिणाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने पीड़ित परिवारों को 20 हजार रुपये में बच्चे की मौत का सौदा करने जैसा व्यवहार किया। उन्होंने बैगा समुदाय के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का आरोप लगाते हुए कहा कि बच्चों की जान वापस नहीं लाई जा सकती, लेकिन इस घटना से स्वास्थ्य व्यवस्था और कुपोषण के मुद्दे पर विचार करना जरूरी है।
श्री पटवारी ने सागर में जहरीली शराब और किरनापुर थाने में पिटाई के मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेता अवैध शराब बेचते हैं और पुलिस प्रशासन इसमें सहयोग करता है। उन्होंने किसानों को तीन हजार 200 रुपये समर्थन मूल्य और लाड़ली बहना योजना के तहत तीन हजार रुपये प्रतिमाह देने की मांगों का भी उल्लेख किया। कांग्रेस की न्याय यात्रा अंबेडकर चौक से शुरू हुई। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार के विरोध में नारेबाजी की। विश्वेश्वरैया चौक पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोक दिया, जहां अधिकारियों ने ज्ञापन लिया।
आंदोलन को लेकर पुलिस और प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। मुख्य मार्गों पर बैरिकेड्स लगाए गए थे। अस्पताल परिसर में भी बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। काली पुतली चौक से अंबेडकर चौक तथा जयस्तंभ चौक से अंबेडकर चौक तक आवाजाही पूरी तरह बंद रही। इससे लोगों को आवागमन में परेशानी हुई और शहर के आंतरिक मार्गों तथा तंग गलियों में दिनभर कई बार यातायात प्रभावित हुआ।
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