जौनपुर , जुलाई 25 -- उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में मानसून के दौरान दिमागी बुखार (जापानी इंसेफेलाइटिस-जेई एवं एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम-एईएस) के संभावित खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। विभाग ने लोगों से साफ-सफाई बनाए रखने, मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाने तथा लक्षण दिखाई देने पर तत्काल सरकारी अस्पताल में उपचार कराने की अपील की है।

जिला मलेरिया अधिकारी सुनील कुमार यादव ने शनिवार को बताया कि दिमागी बुखार एक वायरस जनित संक्रामक रोग है, जो मुख्य रूप से मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलता है। यह वायरस प्रायः शूकर (सूअर) और जंगली पक्षियों में पाया जाता है तथा संक्रमित मच्छरों के माध्यम से मनुष्यों तक पहुंचता है।

उन्होंने बताया कि जहां लंबे समय तक जलभराव, गंदगी और मच्छरों की अधिकता रहती है, वहां इस बीमारी के फैलने की आशंका बढ़ जाती है। वर्ष 2025 में जौनपुर जिले में दिमागी बुखार के दो मामले सामने आए थे, जबकि वर्ष 2026 में अब तक इस बीमारी का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है। इसके बावजूद वर्षा ऋतु में संक्रमण की संभावना को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क है।

दिमागी बुखार के नोडल अधिकारी डॉ. आलोक सिंह ने बताया कि तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, बेहोशी, शरीर में झटके, मानसिक भ्रम, बोलने में कठिनाई, मुंह से झाग आना तथा गंभीर स्थिति में कोमा या लकवा जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे नजरअंदाज न करें और तत्काल निकटतम सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में चिकित्सकीय परामर्श लें। समय पर उपचार से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

जिला मलेरिया अधिकारी ने लोगों से घरों और आसपास के क्षेत्रों में साफ-सफाई बनाए रखने, जलभराव समाप्त करने, झाड़ियों की नियमित सफाई कराने, मच्छरदानी का उपयोग करने, पूरी बांह के कपड़े पहनने तथा बच्चों का जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) का टीकाकरण समय पर कराने की अपील की। उन्होंने झोलाछाप चिकित्सकों और झाड़-फूंक जैसी अवैज्ञानिक उपचार पद्धतियों से बचने की भी सलाह दी।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान के तहत स्वास्थ्य, नगर विकास, पंचायती राज, पशुपालन तथा अन्य संबंधित विभाग संयुक्त रूप से सफाई, मच्छर नियंत्रण, जनजागरूकता और टीकाकरण अभियान चला रहे हैं, ताकि दिमागी बुखार सहित अन्य संचारी रोगों की रोकथाम प्रभावी ढंग से की जा सके।

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