भुवनेश्वर , जून 23 -- ओडिशा सरकार ने अल नीनो के कारण होने वाली संभावित बारिश की कमी से निपटने के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं और सरकार ने देवगढ़, सुंदरगढ़, क्योंझर, मयूरभंज, कोरापुट, रायगड़ा, मलकनगिरी तथा नबरंगपुर जिलों को विशेष निगरानी में रखा है।

राज्य के उप मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री कनक वर्धन सिंह देव ने कहा कि सरकार ने बुवाई में देरी, खेतों में नमी की कमी, जलाशयों के गिरते जल स्तर और कीटों के संभावित प्रकोप से निपटने के लिए एक व्यापक आकस्मिक योजना तैयार की है।

खरीफ 2026 की तैयारियों के तहत, राज्य ने 57 लाख 88 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में खेती का लक्ष्य तय किया है और रियायती दरों पर प्रमाणित बीजों के वितरण की व्यवस्था की है। किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए 14,350 क्विंटल बीजों का एक रणनीतिक भंडार बनाया गया है, जिसमें 7,500 क्विंटल धान और 6,850 क्विंटल गैर-धान के बीज शामिल हैं। उर्वरकों की अनुमानित 11 लाख 42 हजार टन की मांग के मुकाबले 6 लाख 40 हजार टन खाद पहले ही किसानों को उपलब्ध करा दी गयी है।

सरकार कृषि में जलवायु अनुकूल बदलाव लाने के लिए आधुनिक तकनीक का भी उपयोग कर रही है। किसानों को कृषि समृद्धि हेल्पलाइन के माध्यम से समय पर मौसम की सलाह दी जा रही है, जबकि टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए सभी जिलों और ब्लॉकों में खेत बचाओ अभियान और प्राकृतिक खेती की कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं।

श्री सिंह देव ने कहा कि सरकार फसलों की सुरक्षा और जोखिम कम करने के उपायों के माध्यम से किसानों की आजीविका को प्राथमिकता दे रही है। कीटों की निगरानी और रोग प्रबंधन के लिए ओडिशा कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय तथा कृषि विज्ञान केंद्रों के विशेषज्ञ दलों को तैनात किया गया है।

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