सहारनपुर , अक्टूबर 29 -- करवा चौथ के पावन पर्व पर इस वर्ष सुहागिनों के संयम और अटूट प्रेम की एक अलग ही परीक्षा देखने को मिली। देश के कई हिस्सों में पूजा के दौरान अचानक हुई बारिश और आसमान में छाए बादलों ने चांद के दीदार में बाधा पैदा कर दी, जिससे व्रत रखने वाली महिलाओं को कुछ पलों के लिए असमंजस का सामना करना पड़ा। इस स्थिति के कई सकारात्मक और नकारात्मक पहलू सामने आए हैं। सकारात्मक पक्ष की बात करें तो ज्योतिष और मान्यताओं के अनुसार व्रत के दिन बारिश होना बहुत शुभ माना जाता है, जिसे प्रकृति का आशीर्वाद और वैवाहिक जीवन में शीतलता लाने वाला संकेत माना गया है। इसके अलावा, बादलों और बारिश के बीच भी महिलाओं के उत्साह में कोई कमी नहीं आई और उनके अटूट संकल्प तथा प्रेम की एक मिसाल देखने को मिली। बारिश की वजह से मौसम भी काफी सुहाना हो गया और उमस से राहत मिली, जिससे यह करवा चौथ परिवारों के लिए एक बेहद यादगार अनुभव बन गया।

वहीं दूसरी ओर, इस स्थिति के कुछ नकारात्मक पहलू भी रहे। करवा चौथ के व्रत में चंद्रमा को अर्घ्य देने का विशेष महत्व होता है, लेकिन बादलों की वजह से समय पर चांद न दिखने के कारण महिलाओं को व्रत खोलने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। तेज बारिश के चलते छतों पर की जाने वाली पूजा की तैयारियां भी प्रभावित हुईं और महिलाओं को असुविधा का सामना करना पड़ा। समय पर चांद न दिखने से कुछ देर के लिए मानसिक तनाव और असमंजस की स्थिति भी बनी रही।

इन तमाम बाधाओं के बावजूद महिलाओं ने धैर्य और सकारात्मकता के साथ अपने व्रत को पूरा किया। बादलों की लुकाछिपी के बीच जब आखिरकार चांद के दर्शन हुए और महिलाओं ने छलनी से अपने पति का चेहरा देखकर व्रत खोला, तो सभी कठिनाइयां खुशी में बदल गईं और यह पर्व पूरी आस्था के साथ संपन्न हुआ।

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