बारां , फरवरी 19 -- राजस्थान के बारां शहर में बछड़े के शव मिलने के बाद बंद एवं प्रदर्शन के दौरान गौ-सेवकों पर पुलिस के बल प्रयोग का विवाद थम नहीं रहा है।

सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि इस मामले में पहले पुलिस अधीक्षक द्वारा पहले एक सहायक उपनिरीक्षक सहित तीन पुलिस कर्मियों को लाइन हाजिर किये जाने के बाद हाल ही में कोतवाली प्रभारी पुलिस निरीक्षक को भी लाइन में भेजने से पुलिस महकमे में हलचल पैदा हो गयी है। कारण बताया जा रहा है कि महज राजनीतिक दबाव में जिला पुलिस प्रशासन को न चाहते हुए भी इस तरह की कार्रवाई को अंजाम देना न्याय संगत नहीं है।

उल्लेखनीय है कि गत दिनों बारां बंद के दौरान प्रताप चौक पर गौसेवक धरने पर बैठे थे। पुलिस ने उन्हें हटाने के लिए बल प्रयोग किया। घटना के बाद शहर में नाराजगी बढ़ी और लोगों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाये। ऐसे में सत्तापक्ष के नेता, जनप्रतिनिधि सक्रिय हो गये। पुलिस ने इस मामले में 10 से अधिक लोगों को हिरासत में भी लिया था, जिन्हें आनन फानन में छोड़ भी दिया गया।

माहौल को शांत करने के लिए पुलिस अधीक्षक अभिषेक अंदासु ने उस समय कहा था कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। अब जांच के दौरान दोषी पाये गये तीन पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया।

मंगलवार को गाज कोतवाली थाना प्रभारी पुलिस निरीक्षक (सीआई) योगेश चौहान पर भी गिरी और उन्हें भी लाइन हाजिर कर दिया गया, जिससे महकमे में नाराजगी बढ़ गई है। पुलिस विभाग मेंं सवाल उठाए जा रहे हैं कि लाठीचार्ज हुआ है तो मौके पर आदेश देने वाला मजिस्ट्रेट कौन था। मौके पर प्रशासनिक और पुलिस के बड़े अधिकारी भी मौजूद थे, तो फिर तलवार तीन कार्मिकों के साथ सीआई पर ही क्यों लटकी।

पुलिसकर्मियों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से छोटे अधिकारियों, कार्मिकों का मनोबल गिरता है।

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