बारां , सितम्बर 20 -- राजस्थान के बारां जिले के छह नगर निकायों में अध्यक्ष पद के लिए चल रही सियासी उठापटक का सोमवार को पटाक्षेप होगा।

बारां नगर परिषद में आम आदमी पार्टी ने 60 में से 31 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। कांग्रेस के 18 और भाजपा के नौ पार्षद हैं, जबकि दो सीटें निर्दलीयों के खाते में गई हैं। बहुमत के लिहाज से आप की स्थिति स्पष्ट है और पार्टी ने शीतल राठौर को सभापति पद का प्रत्याशी बनाया है।इसके बावजूद पिछले दिनों से जोड़-तोड़ की चर्चाओं ने सियासी हलचल बनाए रखी हैं। बहुमत वाले खेमे की ओर से पार्षदों पर लगातार निगरानी रखे जाने की चर्चाएं भी शहर में बनी हुई हैं। अब अंतिम फैसला सोमवार को सामने आएगा।

अंता नगर पालिका में मुकाबला सबसे रोचक स्थिति में है। भाजपा और कांग्रेस दोनों के पास 16-16 पार्षद हैं, जबकि तीन निर्दलीय पार्षद किसी भी खेमे का गणित बदल सकते हैं। भाजपा ने धनराज चौरसिया और कांग्रेस ने प्रदीप नागर को अध्यक्ष पद के लिए मैदान में उतारा है। ऐसे में अध्यक्ष पद की चाबी तीन निर्दलीयों के रुख पर निर्भर मानी जा रही है।

छबड़ा में भाजपा के 14, कांग्रेस के 12, बसपा के दो और सात निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुए हैं। भाजपा ने रीना सुमन और कांग्रेस ने नीतू सोनी को अध्यक्ष पद का प्रत्याशी बनाया है। संख्या बल के बावजूद निर्दलीयों की भूमिका यहां भी अहम है। छबड़ा की राजनीति में विधायक प्रताप सिंह सिंघवी का प्रभाव माना जाता है, ऐसे में फैसला स्थानीय सियासी समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगा।

वहीं अटरू नगर पालिका के 25 वार्डों में कांग्रेस ने 14 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। भाजपा के 10 और एक निर्दलीय पार्षद ने जीत दर्ज की। कांग्रेस ने निशा नैनीवाल को, जबकि भाजपा ने कृष्णमुरारी दिलावर को अध्यक्ष पद का प्रत्याशी बनाया है।

कांग्रेस के स्पष्ट बहुमत के बावजूद यहां भी राजनीतिक सेंधमारी की चर्चाएं बनी हुई हैं। चुनाव प्रचार के दौरान विधायक राधेश्याम बैरवा ने भी पार्टी के पक्ष में जोर लगाया था। अब देखना होगा कि बहुमत का गणित बरकरार रहता है या अंतिम समय में कोई नया समीकरण सामने आता है।

सीसवाली के 20 वार्डों में कांग्रेस को नौ, भाजपा को छह और निर्दलीयों को पांच सीटें मिली हैं। कांग्रेस ने पीयूष खंडेलवाल और भाजपा ने रामशंकर वैष्णव को अध्यक्ष पद का प्रत्याशी बनाया है। यहां किसी भी दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है। लिहाजा पांच निर्दलीय पार्षदों की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है।

मांगरोल नगर पालिका में भाजपा बहुमत की स्थिति में है। अध्यक्ष पद के लिए भाजपा ने भूपेंद्र सुमन, कांग्रेस ने राजेंद्र सुमन और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नदीम अख्तर मैदान में हैं। यहां अन्य निकायों की तुलना में स्थिति अपेक्षाकृत स्पष्ट दिखाई देती है, लेकिन अंतिम फैसला सोमवार को ही सामने आएगा।

छहों निकायों के अध्यक्ष पद के नतीजे स्थानीय बोर्ड गठन से आगे की सियासत के लिए भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। छबड़ा में विधायक प्रताप सिंह सिंघवी और पूर्व विधायक करण सिंह राठौड़, बारां-अटरू क्षेत्र में विधायक राधेश्याम बैरवा और पूर्व विधायक पानाचंद मेघवाल और अंता क्षेत्र में विधायक एवं पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया की राजनीतिक पकड़ और संगठनात्मक प्रभाव की भी चर्चा हो रही है। वहीं सांसद दुष्यंत सिंह के संसदीय क्षेत्र में आने वाले इन निकाय परिणामों पर भी राजनीतिक नजरें टिकी हैं।

बहरहाल, सोमवार को अध्यक्ष पद के फैसले के साथ यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि किस दल का संख्याबल बोर्ड की सत्ता में तब्दील होता है और कहां निर्दलीय पार्षद अंतिम समय में सत्ता का गणित बदलते हैं।

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