चेन्नई , जुलाई 03 -- भारत में पहला निजी तौर पर निर्मित कक्षीय प्रक्षेपण यान 'विक्रम-1' परीक्षण के लिए पूरी तरह तैयार है और इसे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्पेसपोर्ट से प्रक्षेपित किया जायेगा।

कंपनी के मुताबिक इसे 'मिशन आगमन' नाम दिया गया है। यह मिशन भारत की शानदार अंतरिक्ष यात्रा में निजी कक्षीय परीक्षण के दौर की शुरुआत करेगा। इस रॉकेट को हैदराबाद की कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने बनाया है।

कंपनी ने बताया कि परीक्षण के लिए 12 जुलाई से चार अगस्त के बीच का समय तय किया गया है। सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, शार के पहले परीक्षा पैड पर पूरी तरह तैयार किये गये इस रॉकेट को 60 डिग्री के झुकाव के साथ 450 किलोमीटर की पृथ्वी की निचली कक्षा में प्रक्षेपित किया जायेगा।

स्काईरूट ने सोशल मीडिया पर एक्स पर कहा, "विक्रम-1, परीक्षण-1: मिशन आगमन की घोषणा - भारत का पहला निजी कक्षीय परीक्षण का परीक्षण सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र श्रीहरिकोटा। 450 किलोमीटर, 60 डिग्री झुकाव,पृथ्वी की निचली कक्षा में। प्रक्षेपण का समय: 12 जुलाई -0 4 अगस्त।"कंपनी ने कहा, "रॉकेट अब भारत के ऐतिहासिक पहले प्रक्षेपण पैड (एफएलपी) पर पूरी तरह तैयार है। भारतीय अंतरिक्ष उड़ान के एक नए अध्याय के लिए उल्टी गिनती शुरू हो गयी है।" स्काईरूट ने कहा, "एक रॉकेट अरबों लोगों का भरोसा। इसे मुमकिन बनाने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधा संगठन (इसरो) और इनस्पेस का धन्यवाद।" एक अन्य पोस्ट में कंपनी ने कहा, "आगमन का मतलब है 'आना'। मिशन आगमन को पेश करते हुए गर्व हो रहा है। यह दुनिया के मंच पर एक नए भारतीय रॉकेट के आगमन और स्काईरूट में हम सभी के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक है। यह भारत की अंतरिक्ष यात्रा और निजी कक्षीय प्रक्षेपण के नये दौर की शुरुआत करता है। विक्रम-1, टेस्ट फ़्लाइट-1....आगे और ऊपर की ओर।"अट्ठारह नवंबर, 2022 को भारत के पहले निडी तौर पर बनाए गए रॉकेट, उप-कक्षीय प्रक्षेपण यान 'विक्रम-एस' के सफल परीक्षण के बाद स्काईरूट का यह दूसरा मिशन है। 'विक्रम-एस' इसकी पहली उप-कक्षीय प्रक्षेपण था जिसे श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया गया था। 'प्रारंभ' नाम के इस ऐतिहासिक मिशन ने भारत से पहली बार किसी निजी रॉकेट के प्रक्षेपण को अंजाम दिया। योजना के अनुसार, 'सिंगल-स्टेज सॉलिड रॉकेट' 155 सेकंड में लगभग 89.5 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचा।

इसरो ने बताया कि इस साउंडिंग रॉकेट में तीन पेलोड ले जाए गए थे। ये पेलोड हैं - बाजूमक(बीएजेडओओएमक्यू) आर्मेनिया, स्पेस किड्स इंडिया और N-स्पेस टेक इंडिया। सामान्य रूप से ऊपर की ओर जाने के चरण के बाद, व्हीकल ने अपना मिशन प्रोफ़ाइल सफलतापूर्वक पूरा किया और बंगाल की खाड़ी में 125 किलोमीटर दूर गिरा। इस मिशन ने विक्रम-सीरीज़ के कक्षीय लॉन्चर के लिए ज़रूरी तकनीक को परखा, जिसमें ठोस प्रणोदन प्रणाली, कार्बन कम्पोजिट स्ट्रक्चर, एवियोनिक्स और टेलीमेट्री शामिल हैं। इस सफल प्रदर्शन ने अब स्काईरूट के आने वाले कक्षीय प्रक्षेपण यान , 'विक्रम-1' के लिए रास्ता साफ़ कर दिया है।

स्काईरूट के अनुसार, 'मिशन आगमन' का मुख्य मकसद 'विक्रम-1' रॉकेट की सभी प्रमुख प्रणाली जैसे प्रोपल्शन, स्टेज सेपरेशन, गाइडेंस, नेविगेशन, कंट्रोल और पूरे यान के प्रदर्शन से जुड़ी ज़रूरीडेटा इकट्ठा करना है। इस डेटा का इस्तेमाल व्हीकल के डिज़ाइन को सत्यापित करने और एक भरोसेमंद, उच्च-आवृत्ति वाणिज्यिक प्रक्षेपण कार्यक्रम को विकसित करने में मदद के लिए किया जायेगा।

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