वाराणसी , मार्च 13 -- वाराणसी स्थित सारनाथ के ऐतिहासिक महत्व को लेकर अब एक बड़ा तथ्य सामने आया है, जिसने पुराने दावों को बदल दिया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने नए शोधों और साक्ष्यों के आधार पर आधिकारिक रूप से यह स्वीकार कर लिया है कि सारनाथ के ऐतिहासिक महत्व का पता किसी ब्रिटिश अधिकारी ने नहीं, बल्कि राजवंश के सदस्य और जमींदार रहे बाबू जगत सिंह द्वारा कराए गए उत्खनन से चला था।
इस ऐतिहासिक सुधार की जानकारी बाबू जगत सिंह के वंशज और राजपरिवार के प्रतिनिधि प्रदीप नारायण सिंह ने दी है। इसके साथ ही, सारनाथ परिसर में लगे शिलापट्ट पर भी आवश्यक संशोधन कर दिया गया है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक वाई. एस. रावत ने दूरभाष पर पुष्टि की कि प्रामाणिक शोधों से यह सिद्ध हुआ है कि सारनाथ का प्रथम उत्खनन 18वीं शताब्दी में बाबू जगत सिंह द्वारा कराया गया था। इसी खुदाई के बाद इस स्थान का वास्तविक ऐतिहासिक महत्व उजागर हुआ। विभाग ने अब वहां लगे शिलापट्ट पर बाबू जगत सिंह का नाम अंकित कर उन्हें श्रेय दे दिया है।
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