रांची , मई 10 -- झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर धनबाद में पुलिस-अपराधी गठजोड़, कोयला चोरी, भय के माहौल एवं पूरे प्रकरण की एनआईए जांच कराने की मांग की है।

श्री मरांडी ने पत्र में लिखा है कि झारखंड, विशेषकर धनबाद की स्थिति आज कानून व्यवस्था और लोकतांत्रिक शासन के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। हाल ही में कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान द्वारा विदेश से सोशल मीडिया के माध्यम से अलग-अलग दिनों में जारी वीडियो में धनबाद पुलिस प्रशासन, कोयला तंत्र और कथित वसूली नेटवर्क को लेकर उजागर किए गए तथ्यों ने पूरे राज्य की प्रशासनिक विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन दोनों वीडियो को डीवीडी में संकलित कर इस पत्र के साथ संलग्न किया जा रहा है, ताकि सरकार स्वयं तथ्यों की गंभीरता को समझ सके।

श्री मरांडी ने पत्र में लिखा है कि यह मामला केवल किसी अपराधी के बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न है जो जनता की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने का दावा करती है। आमतौर पर पुलिस अपराधियों का पर्दाफाश करती है, लेकिन झारखंड में स्थिति इतनी विचित्र होती दिखाई दे रही है कि अब गैंगस्टर ही पुलिस अधिकारियों के कथित काले कारनामों का खुलासा कर रहे हैं। धनबाद के वर्तमान एसएसपी श्री प्रभात कुमार को लेकर सामने आए आरोप केवल किसी एक अधिकारी पर टिप्पणी नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की निष्पक्षता और साख पर गंभीर प्रहार हैं।

आज धनबाद की स्थिति ऐसी प्रतीत हो रही है मानो वहां कानून का शासन नहीं, बल्कि दो समानांतर गिरोहों के बीच वर्चस्व की लड़ाई चल रही हो। एक तरफ गैंगस्टर प्रिंस खान का नेटवर्क है और दूसरी ओर वर्दीधारी तंत्र। दोनों के बीच प्रतिस्पर्धा इस बात की दिखाई दे रही है कि धनबाद के कोयले, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों पर किसका अधिक नियंत्रण होगा तथा व्यापारियों और आम नागरिकों के मन में कौन अधिक भय पैदा करेगा। फर्क केवल इतना दिखाई दे रहा है कि एक बिना वर्दी के कथित वसूली कर रहा है और दूसरा वर्दी पहनकर कर रहा है।

वीडियो में उजागर की गई बातें अत्यंत गंभीर हैं। गरीबों और कमजोर लोगों की जमीनों पर कब्जा कराने के प्रयास, माइनिंग माफियाओं और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच कथित गठजोड़, तथा सत्ता और वर्दी के प्रभाव से भय का वातावरण बनाने जैसे आरोप लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अत्यंत चिंताजनक हैं। व्यापारियों और उद्योग जगत के बीच भी कथित वसूली और दबाव की मानसिकता बढ़ने की बात सामने आ रही है, जिससे जनता का कानून व्यवस्था पर विश्वास लगातार कमजोर पड़ता जा रहा है।

आमतौर पर बड़ा से बड़ा अपराधी भी सीधे पुलिस तंत्र से टकराने से बचता है, लेकिन धनबाद में जिस प्रकार एक गैंगस्टर खुलेआम एसएसपी को चुनौती दे रहा है, वह पुलिस तंत्र की गिरती साख और पुलिस का भय कम होने का संकेत है। इससे साफ प्रतीत होता है कि अपराधियों के मन में कानून और पुलिस प्रशासन का डर लगातार कम हो रहा है।

झारखंड की स्थिति आज इस हद तक पहुंच चुकी है कि जनता के बीच यह धारणा बनती जा रही है कि कुछ अधिकारियों और अपराधियों के बीच मूलभूत अंतर केवल वर्दी का रह गया है-एक वर्दी पहनकर कथित धंधा कर रहा है और दूसरा बिना वर्दी के। जब कानून लागू करने वाले और कानून तोड़ने वालों की छवि जनता की नजर में धुंधली होने लगे, तब यह पूरे सिस्टम के पतन होने का संकेत होता है।

यदि इन आरोपों में तनिक भी सच्चाई है, तो यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था के गंभीर क्षरण का संकेत है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि जनता के बीच यह चर्चा आम हो चुकी है कि धनबाद जैसे संवेदनशील जिलों में करोड़ों रुपये की कथित बोली लगाकर पोस्टिंग हासिल की जाती है। यदि इसमें सत्यता है, तो ऐसी पोस्टिंग कानून व्यवस्था सुधारने के लिए नहीं बल्कि "एक्सटॉर्शन लाइसेंस" की तरह इस्तेमाल की जा रही है।

श्री मरांडी ने पत्र में यह भी लिखा है कि मुख्यमंत्री धनबाद आज समानांतर वसूली नेटवर्क का केंद्र बनता जा रहा है। व्यापारी, उद्योगपति, कोयला कारोबारी और आम नागरिक भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर हैं। जब जनता को अपराधियों से कम और व्यवस्था से अधिक भय लगने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि शासन व्यवस्था गहरे संकट में है।

कहा जा रहा है कि अपराधियों का यह नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर से संचालित हो रहा है तथा इनके द्वारा पाकिस्तान से भी हथियार मंगाए जाने जैसी बातें समय-समय पर समाचारों और चर्चाओं में सामने आती रही हैं। यदि इन तथ्यों में तनिक भी सच्चाई है, तो यह केवल झारखंड ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय है।

श्री मरांडी ने पत्र में लिखा है कि इससे पूर्व भी ऐसे ही अंतरराष्ट्रीय अपराध संचालन नेटवर्क, संगठित वसूली तंत्र एवं धनबाद में बढ़ते अपराध-प्रशासन गठजोड़ को लेकर आपको पत्र लिखकर अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक आपकी सरकार की ओर से कोई ठोस एवं प्रभावी कार्रवाई होती दिखाई नहीं दे रही है। परिणामस्वरूप अपराधियों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं और आम जनता के बीच भय एवं असुरक्षा का वातावरण गहराता जा रहा है।

इन आरोपों की गंभीरता, अंतर्राज्यीय एवं संगठित अपराध की संभावित प्रकृति तथा प्रशासनिक तंत्र से जुड़े कथित संरक्षण को देखते हुए इस पूरे मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से कराई जाना अत्यंत आवश्यक प्रतीत होता है, ताकि निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय जांच सुनिश्चित हो सके तथा जनता का विश्वास बहाल किया जा सके।

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