बाबा बकाला साहिब/ अमृतसर , मई 31 -- पंजाब सरकार द्वारा पारित 'जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी सत्कार (संशोधन) एक्ट-2026' के विरोध में रविवार को बाबा बकाला साहिब स्थित गुरुद्वारा साहिब पातशाही नौवीं में श्री अकाल तख्त साहिब की सरपरस्ती में एक विशाल पंथक सम्मेलन आयोजित किया गया।
सम्मेलन में विभिन्न सिख संस्थाओं, धार्मिक जत्थेबंदियों, संत समाज, बुद्धिजीवियों और बड़ी संख्या में संगत ने भाग लिया। सम्मेलन में वक्ताओं ने एकमत होकर पंजाब सरकार से एक्ट में शामिल उन प्रावधानों को तुरंत हटाने की मांग की, जिन पर सिख पंथ की ओर से आपत्ति जताई जा रही है। वक्ताओं का कहना था कि बेअदबी के दोषियों को कड़ी सजा देने पर किसी को कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन कानून की कुछ धाराएं सिख धार्मिक परंपराओं, मर्यादा और संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करती हैं।
श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि यह कानून 'मीठा जहर' साबित हो सकता है और इसके जरिए सिख संस्थाओं पर सरकारी नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब विधानसभा सिख पंथ की प्रतिनिधि संस्था नहीं है और धार्मिक मामलों में नियम तय करने का अधिकार केवल सिख संस्थाओं और श्री अकाल तख्त साहिब को है। उन्होंने बताया कि सरकार को आपत्तियों पर विचार करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया था, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया।
जत्थेदार गड़गज्ज ने चेतावनी दी कि जून 1984 के शहीदी सप्ताह के बाद श्री अकाल तख्त साहिब पर पांच सिंह साहिबानों की बैठक बुलाकर अगली रणनीति तय की जाएगी और आवश्यक हुआ तो सख्त निर्णय लिया जाएगा।
इस अवसर पर एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि सिख समाज बेअदबी के दोषियों को कठोर दंड देने के पक्ष में है, लेकिन एक्ट की कुछ धाराएं गुरुद्वारों के ग्रंथियों, पाठी सिंहों, सेवादारों और धार्मिक संस्थाओं को संभावित आरोपियों के दायरे में लाती हैं, जो स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने कानून बनाने से पहले न तो श्री अकाल तख्त साहिब और न ही एसजीपीसी से कोई सलाह-मशविरा किया।
सम्मेलन में पारित प्रस्ताव में कहा गया कि सरकार बेअदबी रोकने के नाम पर सिख धार्मिक मामलों में दखल देने का प्रयास कर रही है। प्रस्ताव में मांग की गई कि एक्ट की सभी विवादित धाराएं तत्काल हटाई जाएं और ऐसा कानून बनाया जाए, जो केवल बेअदबी करने वालों पर केंद्रित हो, न कि धार्मिक सेवाएं निभाने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं पर।
सम्मेलन में यह भी कहा गया कि 2015 के बरगाड़ी और बुर्ज जवाहर सिंह वाला बेअदबी मामलों में अब तक दोषियों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाकर धार्मिक संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप का रास्ता बना रही है। पंथक सम्मेलन ने निर्णय लिया कि सिख समाज की भावनाओं से संबंधित यह प्रस्ताव राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री तक पहुंचाया जाएगा। साथ ही देश के प्रमुख मीडिया संस्थानों को भी इस संबंध में अवगत कराया जाएगा। सम्मेलन ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार विवादित संशोधनों को वापस नहीं लेती, तो श्री अकाल तख्त साहिब को पंथ की राय के अनुसार आगे की कार्रवाई और सख्त निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया जाएगा।
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