मुरैना/श्योपुर , अप्रैल 04 -- मध्यप्रदेश के चंबल संभाग के श्योपुर जिले में वर्ष 2021 के बहुचर्चित बाढ़ राहत राशि घोटाले में प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए 18 पटवारियों के खिलाफ अभियोजन चलाने की मंजूरी दे दी है। इस निर्णय के बाद राजस्व विभाग में हड़कंप की स्थिति बन गई है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार कलेक्टर अर्पित वर्मा ने घोटाले में संलिप्त पाए गए पटवारियों के विरुद्ध अभियोजन की स्वीकृति प्रदान की है, जिसके बाद पुलिस अब आरोपियों की गिरफ्तारी की तैयारी में जुट गई है। यह मामला जिले की बड़ौदा तहसील से जुड़ा है, जहां बाढ़ पीड़ितों के नाम पर फर्जीवाड़ा कर करोड़ों रुपये की राहत राशि का गलत वितरण किया गया था।
जांच में सामने आया कि वास्तविक पीड़ितों को दरकिनार कर फर्जी नामों के माध्यम से लगभग 2 करोड़ 57 लाख रुपये की राशि का दुरुपयोग किया गया। इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 409 और 120-बी के साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। घोटाले में तत्कालीन तहसीलदार अमिता सिंह तोमर को मुख्य आरोपी बनाया गया था, जिन्हें गत 26 मार्च को ग्वालियर से गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। वर्तमान में वे शिवपुरी जेल में निरुद्ध हैं।
इस प्रकरण में कुल 110 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें 28 पटवारी शामिल हैं। अब 18 पटवारियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद कार्रवाई का दायरा और स्पष्ट हो गया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार आरोपियों के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई के साथ-साथ विभागीय जांच और निलंबन की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।
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