जगदलपुर , अक्टूबर 13 -- छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में बाढ़ से फसलों को हुए नुकसान के एवज में घोषित मुआवजा राशि को लेकर किसानों में नाराजगी बढ़ गई है। बकावंड विकासखंड के ग्राम धोबीगुड़ा में बाढ़ प्रभावित किसानों ने प्रति हेक्टेयर आठ हजार रुपये के मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए नुकसान का आकलन करने पहुंची राजस्व विभाग की टीम को बिना सर्वे किए वापस लौटा दिया।

आज प्राप्त जानकारी के अनुसार, हाल ही में आए चक्रवाती तूफान और भीषण बाढ़ से इंद्रावती नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में कृषि फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचा है। धोबीगुड़ा, मालगांव, गुमडेल, कोरपाल, कानापाल, उलनार, कारितगांव और बजावंड सहित आसपास के गांवों में धान एवं अन्य फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।

प्रभावित किसानों का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में प्रति एकड़ लगभग 21 क्विंटल धान की पैदावार होती है, जिसका अनुमानित मूल्य करीब 65 हजार रुपये है। वहीं, खेती में प्रति एकड़ लगभग 30 हजार रुपये की लागत आती है। ऐसे में किसानों ने आठ हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की घोषित मुआवजा राशि को वास्तविक नुकसान की तुलना में बेहद कम बताया है।

किसानों के विरोध के कारण राजस्व विभाग की टीम को बिना नुकसान का आकलन किए लौटना पड़ा। किसानों ने मांग की है कि सरकार फसलों की वास्तविक क्षति और उत्पादन लागत को ध्यान में रखते हुए मुआवजा राशि में वृद्धि करे, ताकि प्रभावित परिवारों को आर्थिक राहत मिल सके।

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