पटना , जून 15 -- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने बिहार में बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए केंद्र सरकार से बहुउद्देश्यीय हाई डैम परियोजना की घोषणा करने की मांग की है। भाकपा के राज्य सचिव रामनरेश पाण्डेय ने सोमवार को बयान जारी कर कहा कि बिहार में बाढ़ का समय शुरू हो चुका है और राज्य के 22 जिले हर वर्ष इसकी त्रासदी झेलते हैं। उन्होंने कहा कि 15 जून से 15 अक्टूबर तक का समय बाढ़ काल माना जाता है। हर साल बाढ़ के कारण हजारों करोड़ रुपये की फसलों का नुकसान होता है और सैकड़ों लोगों की जान चली जाती है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 20 वर्षों में बाढ़ के कारण राज्य में ढाई हजार से अधिक लोगों की मौत हुई है तथा बड़े पैमाने पर कृषि और संपत्ति का नुकसान हुआ है।
श्री पाण्डेय ने कहा कि कोसी, कमला और बागमती नदियों पर नेपाल में बहुउद्देश्यीय हाई डैम का निर्माण ही बाढ़ का स्थायी समाधान है। उन्होंने कहा कि यह केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार की इस गंभीर समस्या को अपेक्षित महत्व नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि पटना उच्च न्यायालय भी इसके स्थायी समाधान की आवश्यकता पर बल दे चुका है।
भाकपा नेता ने कहा कि बाढ़ राहत कार्यों के नाम पर हर वर्ष बड़े पैमाने पर सरकारी धन की लूट होती है। उन्होंने कहा कि बिहार के विकास में बाढ़ सबसे बड़ी बाधा है और जब तक इसका स्थायी समाधान नहीं होगा, तब तक राज्य का समग्र विकास संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि केवल तटबंध और बांध निर्माण से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि इससे नदियों में गाद जमा होने की समस्या और बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि बाढ़ की समस्या के कारण राज्य में बड़े निवेश भी प्रभावित होते हैं। इसलिए औद्योगिक विकास और पूंजी निवेश के लिए बाढ़ का स्थायी समाधान आवश्यक है।
भाकपा के सचिव ने कहा कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी 1960 के दशक से बाढ़ के स्थायी निदान की मांग उठाती रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से बिहार को बाढ़ की त्रासदी से मुक्ति दिलाने के लिए बहुउद्देश्यीय हाई डैम परियोजना की घोषणा करने और इस दिशा में शीघ्र कार्रवाई शुरू करने की मांग की है।
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