कटिहार , सितंबर 09 -- ाढ़ की विभीषिका के बीच जहां जिले के कई इलाकों का सड़क संपर्क प्रभावित है, वहीं स्वास्थ्य विभाग ने लोगों तक इलाज पहुंचाने के लिए मोर्चा संभाल लिया है। सड़क जहां नहीं पहुंच पा रही, वहां बोट क्लीनिक और बोट एम्बुलेंस स्वास्थ्य सेवा की नई राह बन रहे हैं। बिहार सरकार के आपदा मंत्री रत्नेश सदा ने बुधवार को जिले के विभिन्न बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण कर मेडिकल कैंप, बोट क्लीनिक और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने आपदा की इस चुनौतीपूर्ण घड़ी में स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार जारी प्रयासों पर संतोष व्यक्त करते हुए व्यवस्था की सराहना की।

जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में वर्तमान में 24 मेडिकल कैंप संचालित किए जा रहे हैं। इसके अलावा कुरसेला, अहमदाबाद, मनिहारी और बरारी में चार बोट की व्यवस्था की गई है। इन बोट के माध्यम से उन गांवों और टोलों तक स्वास्थ्यकर्मी एवं आवश्यक दवाएं पहुंचाई जा रही हैं, जहां पानी भरने के कारण सड़क मार्ग से पहुंचना मुश्किल है। मेडिकल कैंपों के माध्यम से अब तक 1,700 से अधिक लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं दी जा चुकी हैं।

बाढ़ के दौरान गर्भवती महिलाओं की सुरक्षित डिलीवरी स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता बनी हुई है। प्रखंडवार ऐसी गर्भवती महिलाओं की लाइन लिस्टिंग तैयार की जा रही है, जिनका संभावित प्रसव सितंबर या अक्टूबर में होना है। अहमदाबाद में 29, आजमनगर में 165, बलरामपुर में 149 और बरारी में 110 गर्भवती महिलाओं को विशेष निगरानी में रखा गया है।

स्वास्थ्य विभाग ने निर्देश दिया है कि संभावित प्रसव तिथि से पहले इन महिलाओं को सुरक्षित रूप से संबंधित सीएचसी तक पहुंचाया जाए, जिससे समय पर संस्थागत प्रसव की सुविधा मिल सके। बाढ़ के कारण किसी गर्भवती महिला को स्वास्थ्य सेवा से वंचित न होना पड़े, इसके लिए लगातार फॉलो-अप किया जा रहा है।

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