अलवर , मार्च 12 -- राजस्थान में अलवर जिले के सरिस्का बाघ अभयारण्य की गतिविधियाें को लेकर सरिस्का में बुधवार को मीडिया कार्यशाला आयोजित किया गया।
कार्यशाला में सरिस्का के क्षेत्रीय निदेशक संग्राम सिंह कटियार ने पत्रकारों को बताया कि सरिस्का में वर्ष 2008 में बाघ और गांव का पुनर्वास कार्यक्रम शुरू हुआ था, जो लगातार चल रहा है। आरंभ में दो बाघ लाये गये थे, अब उनमें उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है। वर्तमान में करीब 50 बाघ मौजूद हैं। हर बाघ की निगरानी की जा रही है।
उन्होंने बताया कि सरिस्का में बाघ खत्म होने के बाद से बाघों की संख्या वृद्धि के पीछे उनकी निगरानी व्यवस्था है। सरिस्का का जो क्षेत्रफल है, इसमें अधिकतम 40 बाघ रह सकते हैं, लेकिन यहां 50 बाघ हैं, लिहाजा थोड़ा जंगल भी कम है। अब इसकी वृद्धि के प्रयास किये जा रहे हैं।
श्री कटियार ने बताया कि इसी तरह से वृद्धि होती रही, तो एक वर्ष में करीब 12 बाघों की और वृद्धि हो सकती है। जंगल पूरी तरह सुरक्षित हैं। सरिस्का मेंघास के मैदान का काम चल रहा है। करीब 500 हेक्टेयर में घासयुक्त भूमि तैयार की जा रही है। पर्यटकों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है, क्योंकि सरिस्का एनसीआर में आता है, जो दिल्ली के नजदीक है। इसलिए पर्यटक लगातार सरिस्का आ रहे हैं। यहां बाघों का दीदार आसानी से होने से पर्यटन को भी काफी बढ़ावा मिल रहा है।
उन्होंने बताया कि इसे पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाया जा रहा है। यहां सुविधायें बढ़ाई जा रही हैं, जिससे आने वाले पर्यटकों को कोई परेशानी नहीं हो। इससे पर्यटन में भी 30 प्रतिशत वृद्धि होने की संभावना है।
श्री कटियार ने बताया कि पर्यटक सबसे ज्यादा बफर जोन में आ रहे हैं। कोर जोन में पर्यटक इसलिए ज्यादा नहीं आते, क्योंकि यहां गहन जंगल है और बाघ जंगल में चले जाते हैं। रास्ते बहुत खराब हैं। इसलिए बफर जोन में ही पर्यटक सबसे ज्यादा आ रहे हैं। बफर जोन में भी लगातार संख्या बढ़ती जा रही है। सरिस्का के उपवन संरक्षक अभिमन्यु सहारण ने बताया कि सरिस्का में जलस्रोत तैयार किये जा रहे हैं, जिससे वन्यजीवों को आसानी से पानी मिल सके और गर्मियों में सरिस्का में वन्य जीवों की पानी की कोई कमी नहीं रहेगी, क्योंकि पहले टैंकरों से पानी डाला करते थे, लेकिन अब सोलर बोरवेल जगह-जगह लगायी गयी हैं, जिससे वाटर होल को भरा जाता है और वन्य जीवों को आसानी से पानी उपलब्ध हो जाता है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि ग्रासलैंड तैयार की जा रही है जिसमें नये ब्रीड का काम चल रहा है। मानसून के बाद नये तरीके की वनस्पति सरिस्का में देखने को मिलेगी।
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