नैनीताल , मई 23 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने अपने महत्वपूर्ण आदेश में बागेश्वर जिले की खड़िया खनन करने वाली 32 खदानों (इकाइयों) को अस्थायी रूप से पुनः खनन करने की अनुमति दे दी है। अदालत ने हालांकि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) को निरंतर पर्यावरणीय निगरानी के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने बागेश्वर के पर्यावरणीय रूप से बेहद संवेदनशील क्षेत्र में खनन के पारिस्थितिक प्रभाव से संबंधित याचिकाओं के एक समूह पर 20 मई को सुनवाई करते हुए ये आदेश पारित किए लेकिन आदेश की प्रति आज मिली।
खंडपीठ ने यह फैसला पीसीबी के सदस्य सचिव और जिला खनन अधिकारी की संयुक्त समिति द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट के आधार पर लिया है। समिति ने विगत आठ अप्रैल तक खनन इकाइयों से प्राप्त 74 दावों की जांच की थी।
अदालत में पेश रिपोर्ट में कहा गया कि कुल 74 दावों में से एक इकाई पूरी तरह से अनुपालन में, 61 आंशिक अनुपालन, नौ गैर-अनुपालन तथा दो इकाइयों की अनुमति निरस्त पायी गई। एक अन्य इकाई निरस्तीकरण की प्रक्रिया में है।
आंशिक अनुपालन वाली अधिकांश इकाइयों की विभिन्न अनुमतियां जनहित याचिका के लंबित होने के दौरान समाप्त हो चुकी थी। खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन 42 खनन इकाइयों की संचालन संबंधी अनुमति समाप्त हो चुकी है उनमें से 17 ने नवीनीकरण के लिए आवेदन किया है। अदालत ने इन आवेदनों पर 10 दिन के अंदर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि उन 32 खनन इकाइयों को, जिनके पास संचालन की वैध अनुमति है और जो अन्यथा नियमों के अनुरूप हैं, अस्थायी रूप से खनन संचालन फिर से शुरू करने की अनुमति देने में कोई बाधा नहीं दिखाई देती हैअदालत ने यह भी कहा कि कुछ आकलन (जैसे स्लोप स्टडी) केवल तब प्रभावी रूप से किए जा सकते हैं जब खदानें संचालन में हों।
पिछले वर्ष जनवरी 2025 में उच्च न्यायालय ने बागेश्वर में सभी खनन गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी। यह आदेश एक न्यायिक रिपोर्ट के बाद दिया गया था, जिसमें गंभीर पर्यावरणीय और सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताई गई थीं। रिपोर्ट में कहा गया था कि अत्यधिक खनन के कारण गहरी दरारें बन गई हैं, जिससे भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है।
अदालत ने हालांकि अपने आदेश में पीसीबी को सक्रिय खनन स्थलों की निगरानी करने और दो महीने के भीतर वायु गुणवत्ता एवं सुरक्षा मानकों पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिये हैं।
इसके साथ ही जिन खदानों की संचालन की अनुमति समाप्त हो चुकी है, उनके संबंध में भी अदालत ने प्रशासनिक देरी पर कड़ा रुख अपनाया। ऐसी 42 इकाइयों में से 17 ने नवीनीकरण के लिए आवेदन किया है। खंडपीठ ने पीसीबी को निर्देश दिया कि वह इन आवेदनों पर 10 दिनों के भीतर निर्णय ले।
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