बागपत , अक्टूबर 18 -- उत्तर प्रदेश में बागपत के बड़ागांव स्थित मां मंशा देवी मंदिर आसपास व दूरदराज व अन्य प्रदेशों के लोगों के लिए आस्था और अध्यात्म का केंद्र बना हुआ है। यही कारण है कि रविवार को दुर्गा अष्टमी के उपलक्ष में यहां पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है।

त्रेता युग से जुड़ी मान्यताओं को समेटे यह मंदिर बागपत ही नहीं बल्कि पूरे पश्चिम यूपी का प्रमुख शक्तिपीठ है। नवरात्र में यहां मेला लगता है और दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, हरियाणा तक से हजारों श्रद्धालु मां के दरबार में हाजिरी लगाते हैं। मान्यता है कि मां मंशा देवी सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी करती हैं।

मंदिर का इतिहास त्रेता युग से जुड़ा बताया जाता है। मंदिर समिति के अनुसार, लंकापति रावण हिमालय से मां की प्रतिमा को कठोर तपस्या कर प्रसन्न करके लंका ले जा रहा था। मां ने शर्त रखी थी कि रास्ते में जहां प्रतिमा जमीन पर रखी जाएगी, वहीं वह विराजमान हो जाएंगी। लंका लौटते समय बड़ागांव के समीप रावण प्रतिमा का भार नहीं सह सका और प्रतिमा को जमीन पर रख दिया। तब से मां यहीं विराजमान हो गईं। इसी कारण गांव का नाम रावण उर्फ बड़ागांव पड़ा। बताते हैं कि पुरानी प्रतिमा खंडित होने के बाद यहां करीब 250 वर्ष पुरानी प्रतिमा स्थापित है। मंदिर में भगवान विष्णु की खड़ी प्रतिमा भी भक्तों के आकर्षण का केंद्र है।

मंदिर से जुड़ी एक और चमत्कारी कथा प्रसिद्ध है। मंदिर समिति के पदाधिकारियों की माने तो, अंग्रेजी शासनकाल में बड़ागांव के सेठ लक्ष्मणदास जैन को तोप से उड़ाने की सजा दी जा रही थी। कहा जाता है कि तब देवी ने बाल रूप में प्रकट होकर तीन बार उनकी रक्षा की। चमत्कार देख अंग्रेजों ने उनकी सजा माफ कर दी। इसके बाद सेठ ने मंदिर का भव्य निर्माण कराया।

वर्तमान में मंदिर परिसर में मां मंशा देवी के साथ भगवान विष्णु के दशावतार, राम दरबार, शिव परिवार, हनुमान जी, भैरव बाबा और राधा-कृष्ण की मनोहारी प्रतिमाएं स्थापित हैं, जिससे पूरा परिसर धार्मिक आस्था का केंद्र बना हुआ है।

बागपत की खेकड़ा तहसील से करीब पांच किलोमीटर दूर ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के बड़ागांव कट पर स्थित यह मंदिर दूर से ही दिखाई देता है। चैत्र और शारदीय नवरात्र में साल में दो बार यहां विशाल मेले का आयोजन होता है। दुर्गा अष्टमी पर सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लग जाती हैं और पूरा परिसर 'जय माता दी' के जयकारों से गूंज उठता है।

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