जयपुर , जुलाई 13 -- राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे ने टीबी मुक्त राजस्थान के लिए पंचायतवार प्रभावी निगरानी किये जाने के निर्देश दिये हैं।

श्री बागडे सोमवार को लोकभवन में टीबी उन्मूलन के लिए जनभागीदारी को और सुदृढ़ करने के लिए राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशा के अनुरूप समाज के हर वर्ग को साथ लेकर, इस बीमारी के प्रति फैले डर और भेदभाव को दूर किया जाये। उन्होंने आंकड़ों में नहीं व्यवहार में हरेक मरीज पर ध्यान देने पर जोर दिया तथा कहा कि टीबी को पूरी तरह से खत्म किया जाये। इसके लिए उन्होंने हरेक गांव में घर घर जाने और टीबी मरीजों को वास्तविक रूप में चिन्हित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गांवों में टीबी मुक्त करने के प्रयासों हेतु ग्राम सेवकों को जवाबदेह बनाया जाये।

उन्होंने कहा कि कागज में नहीं वस्तुस्थिति में टीबी रोगियों को रोग मुक्त करने के प्रयास होने चाहिए। उन्होंने टीबी रोगियों के समग्र इलाज और बाद में पोषण पर भी विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि टीबी मुक्त करने के लिए मन से प्रयास हों। उन्होंने जिला कलेक्टर स्तर पर टीबी मरीजों का पता लगाने और उनके प्रभावी निदान के लिए जागरूकता के अधिकाधिक कार्य किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मरीज गोद लेकर कार्य किये जाने के आंकड़ों की वास्तविकता का भी पता लगाया जाये। राज्यपाल ने इससे पहले टीबी रोगी परिवार को निक्षय मित्र कीट का वितरण किया।

इस अवसर पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि सभी विभागों की सहभागिता से राजस्थान को टीबी मुक्त करने के लिए निरंतर प्रभावी प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2030 तक राजस्थान को पूरी तरह से टीबी मुक्त कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि राजस्थान में टीबी मुक्त अभियान के अंतर्गत 90 प्रतिशत लक्ष्य पूर्ण किये जा चुके हैं। इसके तहत 11 हजार 143 अधिक जोखिम वाले गांवों का सर्वे कर 9 हजार 719 गांवों में विशेष शिविर लगाकर टीबी मुक्त राजस्थान के लिए कार्यवाही की गयी है।

श्री खींवसर ने बताया कि देश में सर्वाधिक एक्सरे स्क्रीनिंग राजस्थान में की गयी है। इसी से हमारी 95 प्रतिशत ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त हो गयी है।

इस मौके मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि विश्वभर में टीबी के खिलाफ लड़ाई में भारत के प्रयास आज रॉल मॉडल है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का यह प्रयास है कि हरेक टीबी मरीज को प्रभावी चिकित्सा मिले। उन्होंने टीबी मुक्त राजस्थान के लिये किये जा रहे प्रयासों के बारे में भी जानकारी दी।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि विकसित भारत में स्वस्थ भारत पहली प्राथमिकता रखी गई है। भारत सरकार द्वारा टीबी मुक्त भारत के अंतर्गत पोषण सहायता राशि पांच सौ रुपये से बढ़ाकर एक हजार रुपए कर दी गयी है।

सचिव पंचायती राज एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन निदेशक जोगाराम ने कहा कि शहरी स्थानीय निकायों में टीबी मुक्त वार्ड अभियान चालू किये जाएंगे। शहरी इलाकों में टीबी की जांच के कैंप लगाने की पहल की गयी है। उन्होंने बताया कि स्कूलों में टीबी के बारे में जागरूकता सत्र आयोजित किए जाने और उच्च शिक्षा के तहत भी इस दिशा में जागरूकता के प्रसार पर ध्यान दिया गया है। उन्होंने जनजातीय, ग्रामीण विकास आदि सभी विभागों में टीबी मुक्त अभियान के अंतर्गत किये जाने वाले कार्यों के बारे में विस्तार से अवगत कराया।

सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के आयुक्त राकेश कुमार शर्मा ने बताया कि जनसंपर्क विभाग द्वारा टीबी मुक्त भारत के प्रति जागरूकता के अंतर्गत प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया में निरन्तर प्रभावी वातावरण निर्माण किया गया है। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा 'सुजस' पत्रिका में भी टीबी मुक्त भारत के लिए नियमित सामग्री प्रकाशित की जा रही है। इसके राज्यवार बहुत अच्छे परिणाम आ रहे हैं।

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