जयपुर , जून 12 -- राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े, गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ एवं किसान मोर्चा अध्यक्ष कैलाश चौधरी ने शुक्रवार को जयपुर में आयोजित प्रदेश स्तरीय प्राकृतिक खेती कार्यशाला एवं मल्लखम्भ प्रदर्शन में शिरकत करते हुए किसानों से रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग कम करने एवं प्राकृतिक खेती को अपनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर श्री बागड़े ने अपने संबोधन में किसानों से कहा कि रसायन मुक्त अनाज तैयार करें और लोगों को बीमारियों से बचाने में अपना सहयोग प्रदान करें। उन्होंने कहा कि एक समय जब देश में अनाज नहीं बचा था, तब किसानों ने पूरी मेहनत कर अनाज उगाया। किसानों की मेहनत के कारण ही आज हमारे देश में अनाज के भण्डार हैं। उन्होंने कहा कि किसान गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उत्पादन करें, आमजन ऐसी पैदावार को खरीदने के लिए हमेशा तैयार हैं।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि हमारे किसानों ने पंचगव्य, जीवामृत, बीजामृत और मल्चिंग जैसे प्राकृतिक खेती के तरीकों से मानव और मिट्टी दोनों की सेहत का ध्यान रखा है। इसलिए हमें प्राकृतिक खेती को अधिक से अधिक प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि धरती माता को जहरीले रसायन और कीटनाशकों से नुकसान होता है।
उन्होंने कहा कि किसानों की समृद्धि के लिए राज्य सरकार ने जल एवं ऊर्जा उपलब्धता का विस्तृत रोडमैप बनाया है। इसके तहत रामजल सेतु लिंक परियोजना, यमुना जल समझौता, आईजीएनपी एवं गंगनहर के सुदृढ़ीकरण के साथ-साथ माही, देवास तथा सोम-कमला-अंबा, ब्राह्मणी नदी परियोजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि राजस्थान को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाये गये हैं। विगत ढाई वर्ष में ऊर्जा उत्पादन में प्रदेश ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। हम वर्ष 2027 तक प्रदेशभर में किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध करवाने के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। आज 26 जिलों में किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध करवाई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की डबल इंजन सरकार खेती को लाभकारी और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए हर स्तर पर काम कर रही है। बैलों द्वारा पारंपरिक एवं प्राकृतिक खेती करने पर 30 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की दिशा में वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान, हरियालो राजस्थान जैसी पहल की हैं।
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