बाकू/नयी दिल्ली , अक्टूबर 23 -- विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलियेव से राजधानी बाकू में मुलाकात की।
श्री जयशंकर ने, अजरबैजान के विदेश मंत्री जेहुन बैरामोव के साथ भी द्विपक्षीय वार्ता की। उन्होंने इस बातचीत को "बेहद सार्थक" बताते हुए कहा कि इसने दोनों देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने का रास्ता तय करने में मदद की है।
अज़रबैजान के पाकिस्तान समर्थक रुख, कश्मीर पर बयानों और भारत के आर्मेनिया के साथ नजदीकी संबंधों के कारण पहले उपजे तनाव के बाद उसके साथ संबंधों में सुधार का यह एक महत्वपूर्ण संकेत है। श्री जयशंकर ने पिछले वर्ष अगस्त में अज़रबैजान और आर्मेनिया के बीच हुए शांति समझौते का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि इससे टिकाऊ शांति स्थापित होगी।
इस वर्ष के प्रारंभ में बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्री अलियेव से मुलाकात की थी, जिससे द्विपक्षीय तनाव को कम करने और दोनों पक्षों को संबंधों को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त हुआ था।
अपने संबोधन में श्री जयशंकर ने कहा कि दोनों पक्षों ने आपसी संपर्क पर चर्चा की है क्योंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था में यह बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि दोनों देश अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे से संबंधित हैं। दोनों देश इस बात पर सहमत हुए हैं कि वे इस संबंध में अधिक निकटता से काम करेंगे। दोनों देशों ने विमानन संपर्क बढ़ाने पर भी चर्चा की। दोनों पक्षों ने बाकू-तिबिलिसी-कार्स रेलवे, बाकू बंदरगाह और आलात मुक्त आर्थिक क्षेत्र सहित अज़रबैजान के पूर्व-पश्चिम और उत्तर-दक्षिण गलियारों के कारोबारी अवसरों पर भी विचार-विमर्श किया।
भारत के लिए अज़रबैजान कैस्पियन, मध्य एशिया और यूरोप का प्रवेश द्वार है। वहीं अज़रबैजान के लिए भारत 1.4 अरब लोगों का एक बड़ा बाजार है और एशिया की ओर अपनी साझेदारियों को विविधता देने के उसके प्रयासों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में श्री बैरामोव ने अतीत के कठिन संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मतभेदों ने "द्विपक्षीय संबंधों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के भीतर सहयोग को प्रभावित किया था।" उन्होंने कहा, "आज हमने इन मुद्दों पर खुले और रचनात्मक तरीके से चर्चा की है।"श्री बैरामोव से बैठक के बाद अपने बयान में श्री जयशंकर ने कहा, "हमने इस क्षेत्र के घटनाक्रमों की बारीकी से निगरानी की है... भारत का यह स्पष्ट रुख रहा है कि विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए।" श्री जयशंकर ने कहा कि भारत और अज़रबैजान दोनों ही स्वतंत्र सोच वाले राष्ट्र हैं जो समकालीन महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने निर्णय स्वयं लेते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत और अज़रबैजान का सांस्कृतिक संबंधों का एक लंबा इतिहास रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों राष्ट्र एक-दूसरे के मूल्यों का सम्मान करते हैं, जो अधिक समकालीन साझेदारी की दिशा में काम करने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है।श्री जयशंकर ने कहा कि दोनों देश अपने संबंधों को उच्च स्तर पर ले जा सकते हैं। इस वर्ष की पहली छमाही में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 600 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जबकि 2025 में यह 401 मिलियन डॉलर था।
अज़रबैजान में 1,000 से अधिक भारतीय कंपनियां पंजीकृत हैं। ओएनजीसी विदेश ने 1.2 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया है और अज़ेरी-चिराग-गुनेश्ली क्षेत्रों में 2.925 प्रतिशत तथा बीटीसी पाइपलाइन में 3.097 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती है।
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