गोपालगंज,29अगस्त (वार्ता)बिहार के गोपालगंज जिले के लिए महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजना गोपालगंज बाईपास सड़क निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। बाईपास निर्माण में प्रस्तावित 4.8 हेक्टेयर वन भूमि के अपयोजन के लिये पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा वन संरक्षण एवं संवर्धन अधिनियम, 1980 के प्रावधानों के तहत 26 शर्तों के साथ स्टेज-1 की अनुमति 28 अगस्त 2026 को प्रदान कर दी गई है। वन भूमि के अपयोजन की अनुमति में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। प्रमुख शर्त के रूप में समतुल्य गैर-वन भूमि वन विभाग को हस्तांतरित करने तथा उक्त भूमि को "सुरक्षित वन" के रूप में अधिसूचित करने का प्रावधान है। साथ ही निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप क्षतिपूरक वृक्षारोपण किया जाएगा।

गोपालगंज बाईपास परियोजना मुख्यमंत्री की प्रगति यात्रा के दौरान की गई महत्वपूर्ण घोषणाओं में शामिल थी। परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए जिला प्रशासन द्वारा संबंधित विभागों के साथ समन्वय करते हुए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर प्रस्ताव भेजा गया।

जिला पदाधिकारी द्वारा परियोजना की नियमित समीक्षा एवं निरंतर फॉलोअप किए जाने से विभिन्न स्तरों पर लंबित प्रक्रियाओं के निष्पादन में तेजी आई और अब वन भूमि से संबंधित स्टेज-1 क्लीयरेंस प्राप्त होने के साथ परियोजना के क्रियान्वयन का मार्ग और अधिक प्रशस्त हुआ है।

परियोजना के अंतर्गत 01.73 एकड़ भूमि के भू-अर्जन के लिये भू-धारियों को धारा 21(2) के तहत नोटिस निर्गत कर तामिला कराया जा चुका है। संबंधित विभाग द्वारा भू-अर्जन की प्रक्रिया का त्वरित निष्पादन सुनिश्चित किया जा रहा है।

गोपालगंज बाईपास के निर्माण से शहर से होकर गुजरने वाले बाहरी एवं भारी वाहनों के यातायात को वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा। इससे शहर के प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दबाव कम होने, यातायात व्यवस्था सुगम होने तथा जाम की समस्या में कमी आएगी तथा शहर में यातायात का दबाव होगा कम होगा।

गोपालगंज की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है। बाईपास बनने से ग्रामीण एवं कृषि क्षेत्र बेहतर सड़क संपर्क से जुड़ेंगे। विशेष रूप से गन्ना सहित अन्य कृषि उत्पादों को चीनी मिलों एवं संबंधित बाजारों तक पहुंचाने में किसानों को सुविधा होगी।

बेहतर कनेक्टिविटी से कृषि उत्पादों के परिवहन में लगने वाला समय कम होगा और किसानों को अपने उत्पादों को विभिन्न बाजारों तक पहुंचाने के लिए अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे।

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