बांदा , अक्टूबर 20 -- उत्तर प्रदेश के बांदा नगर में अनूठी परंपरा के तहत रावण के पुतले का दहन करने के साथ पांच दिनों तक आयोजित होने वाला विजयदशमी पर्व मंगलवार से शुरू हो गया। बांदा की प्राचीन परंपरा के अनुसार नगर निवासी सभी एक दूसरे के घर पहुंच कर दशहरे के पर्व पर गले लगा कर बधाइयां व शुभकामनाएं देते हैं। इसके लिये नगर को पांच क्षेत्रों में बाट कर प्रत्येक क्षेत्र में क्रमशः अलग-अलग दिन दशहरा संपन्न होने की परंपरा है। जिसमें निर्धारित तिथि के दिन में संबंधित क्षेत्र में ही मेला का आयोजन किया जाता है और रामलीला मंचन के बाद रावण का विशाल पुतला जलाया जाता है। जिसके बाद उस इलाके में ही दशहरे का पर्व मनाया जाता है। जहां अन्य सभी क्षेत्र के नागरिक घर-घर पहुंच कर एक दूसरे से गले मिलकर बधाइयां और शुभकामनाएं देते हैं और प्रत्येक घर में गृह स्वामी अपनी हैसियत के अनुसार घर पहुंचे अतिथि का सत्कार नमकीन, चाय, बिस्कुट, खीर, हलवा, मिठाइयां ,मेवा, फल आदि खिलाकर करता है।
वर्षों से चली आ रही इस अनूठी परंपरा के अनुसार बांदा नगर को इस वर्ष भी 5 जोनों में बाट कर आज प्रागी तालाब क्षेत्र में दशहरे के पर्व पर एक मेला आयोजित किया गया। जहां रामलीला मंचन के बाद रावण का पुतला फूंका गया और बाद में घर-घर अतिथियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ और एक दूसरे से गले मिलकर बधाइयां और शुभकामनाएं दी गई। साथ ही विभिन्न प्रकार के व्यंजनों से उनका सम्मान किया गया।
परंपरा के अनुसार इसी प्रकार क्रमशः बुधवार को अलीगंज, गुरुवार को छाबी तालाब, शुक्रवार को क्योटरा और शनिवार को काशीराम कॉलोनी इलाकों में मेलों का आयोजन कर रामलीला मंचन के बाद रावण का विशाल पुतला फूकने के बाद विजयदशमी का पर्व संपन्न होगा।
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