पटना , जुलाई 26 -- बिहार की राजधानी पटना में होने वाले बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव पर इस समय समूचे देश की निगाहें टिकी हुई हैं, जहां अकेले अभिमन्यु प्रशांत किशोर को नतमस्तक करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने चालीस महारथियों को मैदान में उतार दिया है।

इन महारथियों में नेता, अभिनेता, गायक और सामाजिक कार्यकर्ता सभी शामिल है। खुद बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरीभारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रत्याशी नीरज सिन्हा के पक्ष में प्रचार कर चुके हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का क्षेत्र होने के नाते उनकी भी प्रतिष्ठा दांव पर है और कायस्थ बहुल इस क्षेत्र में मतों को साधने के लिए उनके साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद तथा अन्य जातीय नेताओं की टोली लगी हुई है। श्री प्रसाद के पिता तथा भारतीय जनसंघ के बड़े नेता ठाकुर प्रसाद 1977 में इस क्षेत्र से विधायक बने थे। करीब तीन लाख 70 हजार मतदाताओं के क्षेत्र बांकीपुर में कायस्थों के बाद दूसरे नंबर पर यादव हैं। इस चुनाव में यादव मतों को लामबंद करने की जिम्मेदारी राजधानी के जाने माने पूर्व सांसद और दानापुर के विधायक रामकृपाल यादव के पास है। इस क्षेत्र में भूमिहार, राजपूत और ब्राम्हण मिल कर करीब 18 से बीस प्रतिशत मतदान का दम रखते हैं। फायर ब्रांड भूमिहार नेता गिरिराज सिंह को हिन्दू और स्वर्ण वोटों को प्रभावित करने के लिए स्टार प्रचारक की सूची में शामिल किया गया है।

इन प्रचारकों के साथ ग्लैमर का तड़का भोजपुरी फिल्म स्टार तथा सांसद मनोज तिवारी और हाल ही में विधान पार्षद बने पवन सिंह लगा रहे हैं। इसमें थोड़ा और रंग भरने ले लिए अलीनगर से चुनी गई विधायक और मशहूर गायिका मैथिली ठाकुर की भी सेवाएं ली गयी हैं। बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी, दिलीप जायसवाल, मंगल पांडेय सहित सभी वरिष्ठ नेता और बिहार सरकार के मंत्री राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) उम्मीदवार नीरज सिन्हा की जीत सुनिश्चित करने में जुटे हुए हैं। यहां तक कि गठबंधन की संयुक्त बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सारे विधायकों से आग्रह कर दिया कि वह बांकीपुर में समय निकाल कर जाएं और गठबंधन के उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार करें।

अब सवाल उठता है कि एक ऐसे विधानसभा क्षेत्र में,जहां पिछले नौ चुनाव भाजपा जीती है, इस बार पार्टी नेताओं की भृकुटि क्यों तनी हुई है। बांकीपुर में आयोजित पिछले नौ चुनावों में पांच बार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और चार बार उनके पिता नवीन किशोर सिन्हा जीते हैं। इस क्षेत्र में कायस्थ के साथ अन्य स्वर्ण जातियों, कुर्मी और कोइरी का एक ऐसा अटूट जोड़ बना है, जो राजग की विजय गाथा लगातार लिखता रहा है। विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) यादव, मुसलमानों और कुछ दलित-पिछड़े समूह के साथ मैदान में उतरता तो है, लेकिन सत्तारूढ़ गठजोड़ के आगे घुटने टेक देता है।

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