न्यूयॉर्क , सितंबर 22 -- भारत ने ऑस्ट्रेलिया, बारबाडोस, ब्राजील, कनाडा, यूरोपीय संघ और केन्या के साथ 'पार्टनर्स फॉर मल्टीलैटरलिज्म' (पी4एम) की शुरुआती सह-प्रायोजक के रूप में नई अंतरराष्ट्रीय पहल में शामिल होकर बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच सहयोग, अंतरराष्ट्रीय कानून, शांति और सतत विकास को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

यह पहल संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च स्तरीय सप्ताह से इतर शुरू की गई। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने और साझा वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए प्रतिबद्ध देशों को एक मंच पर लाना है।

यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने कहा कि स्थायी शांति और समृद्धि हासिल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून, प्रभावी संस्थाएं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि यह पहल संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध देशों को एक साथ लाएगी और साझा वैश्विक चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान तलाशने में मदद करेगी। पी4एम पहल का उद्देश्य बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और जटिल वैश्विक चुनौतियों के बीच बहुपक्षवाद को मजबूत करना और देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। इसमें शामिल देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानून, शांति, सतत विकास और प्रभावी बहुपक्षीय संस्थाओं के समर्थन के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई है।

श्री कोस्टा ने कहा, "पार्टनर्स फॉर मल्टीलैटरलिज्म एक खुला मंच होगा, जो दुनिया भर से उन साझेदारों को एक साथ लाएगा जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर में निहित साझा सिद्धांतों को बनाए रखने और ठोस समाधान के लिए काम करने को तैयार हैं।"उन्होंने कहा कि यह पहल बातचीत और सहयोग के लिए एक मंच उपलब्ध कराएगी और संयुक्त राष्ट्र इसके केंद्र में रहेगा।

भारत ऑस्ट्रेलिया, बारबाडोस, ब्राजील, कनाडा, यूरोपीय संघ और केन्या के साथ पी4एम घोषणा-पत्र के शुरुआती सह-प्रायोजकों में शामिल है।

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब भाग लेने वाले देशों के अनुसार दुनिया "गहरे वैश्विक बदलाव" के दौर से गुजर रही है। इस दौरान बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, संघर्ष, आर्थिक दबाव और नई वैश्विक चुनौतियां सामने आ रही हैं।

घोषणा पत्र में "बढ़ते ध्रुवीकरण, संघर्ष के फैलाव, अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन तथा शक्ति की राजनीति, संरक्षणवाद, दबाव और बल प्रयोग या उसकी धमकी के बढ़ते इस्तेमाल" पर चिंता जताई गई है। घोषणा-पत्र के अनुसार, ये रुझान अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा पर दबाव डाल रहे हैं और ऐसे में मजबूत बहुपक्षीय सहयोग की जरूरत बढ़ रही है।

घोषणा-पत्र में कहा गया, "आज, वैश्विक बदलाव और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर बढ़ते दबाव के समय, हम अपने सामूहिक प्रयासों की नींव के रूप में सहयोग, अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान, बहुपक्षवाद और साझा जिम्मेदारी को चुनते हैं।"भारत के शुरुआती सह-प्रायोजकों में शामिल होने के साथ 'पार्टनर्स फॉर मल्टीलैटरलिज्म' मंच का उद्देश्य बातचीत, समन्वय और व्यावहारिक सहयोग के लिए व्यापक वैश्विक नेटवर्क तैयार करना है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतरराष्ट्रीय कानून और बहुपक्षवाद को केंद्रीय स्थान दिया गया है।

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