तेहरान , जुलाई 15 -- ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसने 'ऑपरेशन नस्र-2' के पांचवें चरण के तहत बुधवार को बहरीन स्थित अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के ठिकाने पर हमला कर सैन्य उपकरणों के बड़े भंडार और ईंधन टैंकों को नष्ट कर दिया।

मेहर न्यूज एजेंसी के अनुसार, आईआरजीसी ने एक बयान में कहा कि हमले में अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) के प्रबंधन केंद्र, कमांड एवं कंट्रोल सेंटर, सैन्य उपकरणों और कलपुर्जों के बड़े गोदामों तथा अमेरिकी बेड़े के ईंधन भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया।

बयान में अमेरिका पर हिंद महासागर में "समुद्री लुटेरों" को तैनात कर होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के नाम पर समुद्री व्यापार मार्गों को अवरुद्ध करने तथा क्षेत्र से तेल एवं गैस की आपूर्ति बाधित करने का आरोप लगाया गया।

आईआरजीसी ने कहा, "अमेरिका को यह जान लेना चाहिए कि उसके समुद्री लुटेरों ने हिंद महासागर से दुनिया के लिए तेल और गैस निर्यात का मार्ग बंद कर दिया है, जिससे अमेरिका के आर्थिक प्रतिद्वंद्वियों के हित खतरे में पड़ गए हैं। ऐसे में उसे यह भी उम्मीद रखनी चाहिए कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के हितों की पूर्ति करने वाले अन्य तेल एवं गैस निर्यात मार्ग भी बंद किए जा सकते हैं।"बयान में कहा गया, "क्षेत्र से तेल और गैस का निर्यात या तो सभी के लिए होगा या फिर किसी के लिए नहीं।"इससे पूर्व, आईआरजीसी ने मंगलवार शाम अमेरिका के ताजा हमलों के जवाब में बहरीन और कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल एवं ड्रोन हमले किये। आईआरजीसी ने एक बयान में कहा कि नौसेना और एयरोस्पेस इकाइयों ने "या ज़ैन अल-आबिदीन" कोड नाम से समन्वित अभियान चलाया।

बयान के अनुसार, बहरीन के शेख ईसा एयर बेस पर अमेरिकी नौसैनिक पोतों और विमानों के लिए हथियार एवं पुर्जे रखने वाले कई गोदाम नष्ट कर दिये गये।

आईआरजीसी ने दावा किया कि कुवैत के अली अल सलेम एयर बेस पर एमक्यू-9 ड्रोन तैनाती रैंप को भी निशाना बनाया गया, जिससे कई ड्रोन नष्ट या क्षतिग्रस्त हो गये। बयान में कहा गया कि यह कार्रवाई कल दोपहर ईरान के कई तटीय सैन्य ठिकानों पर अमेरिकी हमलों के जवाब में की गयी।

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