बहराइच , मई 02 -- उत्तर प्रदेश में बहराइच जिले के नानपारा तहसील परिसर में शनिवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस (तहसील दिवस) उस समय अचानक तनावपूर्ण हो गया, जब जमीन विवाद से परेशान एक महिला जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी और पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव के समक्ष पहुंचकर आत्मदाह की चेतावनी देने लगी। महिला की भावुक अपील और तीखी प्रतिक्रिया से मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
अधिकारियों की मौजूदगी में महिला ने आरोप लगाया कि उसकी पुश्तैनी जमीन को अवैध तरीके से बेच दिया गया है और वह पिछले दो वर्षों से न्याय के लिए तहसील के चक्कर काट रही है, लेकिन अब तक उसे न तो जमीन पर कब्जा मिला और न ही प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई हुई।
पीड़ित महिला की पहचान सुनीता सिंह पत्नी ओम प्रकाश सिंह, निवासी पंडोहिया, थाना नवाबगंज के रूप में हुई है। सुनीता सिंह ने आरोप लगाया कि उनके ससुर दरोगा सिंह के भाई जयपत्तर सिंह ने बंटवारे में मिली जमीन को कथित रूप से बिना बैनामे के बारी खान नामक व्यक्ति को बेच दिया। पीड़िता का कहना है कि उक्त भूमि पर उनका वैधानिक दावा है, लेकिन इसके बावजूद दूसरे पक्ष ने कब्जा कर लिया और अब वहां मकान बनाकर रह रहा है।
तहसील दिवस में अधिकारियों के सामने अपनी पीड़ा बयां करते हुए सुनीता सिंह ने कहा कि वह पिछले दो वर्षों से संबंधित विभागों और तहसील कार्यालय के चक्कर लगा रही हैं, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला। महिला ने चेतावनी दी कि यदि उसे न्याय नहीं मिला तो वह आत्मदाह जैसा कठोर कदम उठाने को मजबूर होगी।
महिला की इस चेतावनी के बाद मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने तत्काल हस्तक्षेप कर उसे शांत कराया। जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने महिला को आश्वस्त करते हुए कहा कि मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी और तथ्य सामने आने के बाद नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, विवादित भूमि का मामला वर्तमान में सिविल न्यायालय में विचाराधीन है, जिसके चलते प्रशासनिक स्तर पर प्रत्यक्ष हस्तक्षेप सीमित है। यही कारण है कि राजस्व विभाग इस प्रकरण में निर्णायक कार्रवाई नहीं कर पा रहा है।
वहीं क्षेत्रीय लेखपाल विनय ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया है कि सुनीता सिंह के ससुर के भाई जयपत्तर सिंह ने बंटवारे की जमीन बारी खान को बिना विधिक बैनामे के दे दी थी। वर्तमान में बारी खान उक्त भूमि पर मकान बनाकर निवास कर रहे हैं। लेखपाल के अनुसार, मामला सिविल कोर्ट में लंबित होने के कारण राजस्व विभाग के स्तर से किसी प्रकार की अंतिम कार्रवाई संभव नहीं हो पा रही है।
तहसील दिवस में घटी इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि भूमि विवादों के निस्तारण में हो रही देरी किस तरह आम नागरिकों को मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से तोड़ रही है। प्रशासनिक तंत्र और न्यायिक प्रक्रिया के बीच फंसे ऐसे मामलों में पीड़ित पक्ष अक्सर खुद को असहाय महसूस करता है।
नानपारा तहसील दिवस की यह घटना न केवल प्रशासनिक संवेदनशीलता की परीक्षा बनकर सामने आई, बल्कि यह भी दर्शाती है कि लंबित भूमि विवाद किस प्रकार सामाजिक तनाव और गंभीर मानवीय संकट का कारण बनते जा रहे हैं।
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