बहराइच , अक्टूबर 13 -- उत्तर प्रदेश में मनरेगा के कथित तौर पर हजारों करोड़ रुपये के बकाया भुगतान, ग्राम पंचायतों के कार्यों की फाइलों के अनुमोदन में देरी और मानदेय समेत विभिन्न समस्याओं को लेकर ग्राम प्रधानों ने मंगलवार को बहराइच कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। पंचायत विकास मंच के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे प्रधानों ने मुख्यमंत्री के नाम जिलाधिकारी के माध्यम से 10 सूत्रीय मांग पत्र सौंपते हुए तीन दिन में समस्याओं का समाधान नहीं होने पर लखनऊ में अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने की चेतावनी दी। पंचायत विकास मंच के प्रदेश संयोजक सूरज शुक्ला ने कहा कि मनरेगा के तहत उत्तर प्रदेश में करीब 4,400 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है, जिसका अब तक समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर प्रधानों ने पिछले दिनों धरना दिया था। उनके अनुसार, नौ और 10 अगस्त को हुए धरने के दौरान प्रभारी मंत्री के आश्वासन पर आंदोलन स्थगित किया गया था, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
शुक्ला ने ग्राम पंचायतों के कार्यों की फाइलों के अनुमोदन में देरी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि तकनीकी कारणों से पंचायत चुनाव नहीं हो पाने के कारण प्रधानों को प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उन्होंने दावा किया कि प्रशासक के रूप में कार्य करने के बावजूद बहराइच में पिछले पांच महीने से फाइलों का अनुमोदन नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने मांग की कि पांच लाख रुपये तक के कार्यों से संबंधित फाइलों के अनुमोदन का अधिकार ब्लॉक स्तर पर दिया जाए, ताकि ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों में अनावश्यक देरी न हो। उन्होंने प्रशासक अवधि का मानदेय जारी करने और मौजूदा मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि करने की भी मांग की।
प्रधानों ने पात्र ग्राम प्रधानों को शस्त्र लाइसेंस देने की प्रक्रिया में छूट प्रदान करने तथा ग्राम प्रधानों सहित अन्य पंचायत प्रतिनिधियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई। इसके अलावा वीबी-जी राम योजना के तहत कामकाज में आ रही तकनीकी समस्याओं, विशेषकर उपस्थिति दर्ज करने वाले ऐप की दिक्कतों को दूर करने पर जोर दिया।
प्रदर्शनकारियों ने ग्राम पंचायतों में एक ही मामले की बार-बार जांच किए जाने की व्यवस्था पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि दोहरी जांच व्यवस्था समाप्त की जाए और जांच के नाम पर ग्राम प्रधानों को अनावश्यक रूप से परेशान करने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।
प्रधानों ने चेतावनी दी कि यदि तीन दिन के भीतर उनकी मांगों का निराकरण नहीं किया गया तो प्रदेश के 57 हजार से अधिक ग्राम प्रधान लखनऊ में अनिश्चितकालीन धरना देने के लिए बाध्य होंगे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बकाया भुगतान, प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तेजी और पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याओं का समाधान किए बिना ग्रामीण विकास कार्यों को गति देना मुश्किल होगा।
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