इटावा , अगस्त 27 -- चंबल घाटी में कभी डाकुओं का खौफ रहा करता था और उनके सफाए में उत्तर प्रदेश पुलिस की रणनीति को बड़ी सफलता मिली थी। वर्ष 2006 में रक्षाबंधन के दिन पुलिस ने चंबल के कुख्यात दस्यु सरगना सलीम गुर्जर और उसकी प्रेमिका गीता जाटव को मुठभेड़ में मार गिराया था। पुलिस के मुताबिक सलीम अपनी बहन से राखी बंधवाने के लिए आया था, लेकिन पुलिस को इसकी भनक लग गई और घेराबंदी कर मुठभेड़ की गई।

यह मुठभेड़ उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के अयाना थाना क्षेत्र में कैथोली के जंगलों में हुई थी। करीब 45 मिनट तक चली मुठभेड़ के बाद फायरिंग थमने पर पुलिस को दो शव मिले, जिनकी पहचान बाद में सलीम गुर्जर और उसकी प्रेमिका गीता जाटव के रूप में हुई।

कानपुर रेंज के तत्कालीन डीआईजी दलजीत चौधरी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कार्रवाई की थी। पुलिस ने मौके से एक मशीनगन, एक डबल बैरल बंदूक और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए थे। सलीम पर करीब डेढ़ लाख रुपये का इनाम घोषित था, जबकि गीता जाटव पर 10 हजार रुपये का इनाम था।

मुठभेड़ के बाद तत्कालीन पुलिस महानिदेशक बुआ सिंह ने कार्रवाई में शामिल 10 एसओजी कर्मियों के लिए पदोन्नति की घोषणा की थी। सलीम गुर्जर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दिल्ली में अपहरण समेत अपराध के 100 से अधिक मामलों में पुलिस के निशाने पर था।

सलीम के साथ मारी गई गीता जाटव मूल रूप से इटावा जिले के सहसो क्षेत्र के रानीपुरा गांव की रहने वाली थी। 28 अगस्त 2005 को उसके अपहरण की रिपोर्ट उसके भाई चंद्रसेन ने दर्ज कराई थी। बाद में सलीम और जगजीवन परिहार गिरोह के बीच हुई मुठभेड़ के बाद मुक्त हुए एक किशोर के बयान के आधार पर पुलिस ने गीता को भी डकैत गिरोह का सदस्य माना और उस पर इनाम घोषित कर दिया।

सलीम गुर्जर मूल रूप से जालौन जिले के रमपुरा क्षेत्र के बिलौड गांव का रहने वाला था। एक समय उसका गिरोह चंबल के खूंखार गिरोहों में गिना जाता था। चंबल के दूसरे कुख्यात दस्यु जगजीवन परिहार के गिरोह के साथ उसकी लंबे समय तक गैंगवार चली। दोनों गिरोहों के बीच कई बार हुई मुठभेड़ों में सलीम गिरोह के दर्जनों सदस्य मारे गए थे।

चंबल घाटी में एक दौर ऐसा भी था, जब चुनाव के दौरान डाकुओं के फरमान और उनके नारे ग्रामीण इलाकों में चर्चा का विषय बनते थे। डाकू अपने करीबी रिश्तेदारों को चुनाव जिताने के लिए प्रभाव और दबाव का इस्तेमाल करते थे। सलीम गुर्जर भी इससे अछूता नहीं रहा। करीब डेढ़ लाख रुपये के इनामी सलीम ने क्वारी नदी के किनारे बसे विंडवा कला गांव में वर्ष 1995 में अपनी बहन को प्रधान बनवाया था। इसके बाद वर्ष 2000 में उसने अपने बहनोई को भी ग्राम प्रधान बनवाने में सफलता हासिल की थी।

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