जगदलपुर , जून 11 -- छत्तीसगढ़ के बस्तर वनमंडल ने वन्यजीवों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से जंगलों और सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित खुले एवं असुरक्षित कुओं को सुरक्षित बनाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है।
अभियान के तहत चिन्हित कुओं के चारों ओर मुंडेर बनाकर उन्हें लोहे की मजबूत जालियों से ढंका जा रहा है।
वन विभाग के अनुसार मुख्य वन संरक्षक आलोक तिवारी के मार्गदर्शन और वनमंडलाधिकारी उत्तम कुमार गुप्ता के नेतृत्व में यह अभियान मानसून से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। वनांचलों और कृषि भूमि में स्थित बिना मुंडेर वाले खुले कुएं लंबे समय से तेंदुए, भालू, हिरण सहित अन्य वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। पानी की तलाश में अथवा रात के समय भटककर इन कुओं में गिरने से कई वन्यजीवों की मौत हो जाती है या वे गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं।
विभाग ने आगामी मानसून को देखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों का सर्वेक्षण कराया, जिसमें 29 ऐसे कुओं की पहचान की गई है जिन्हें तत्काल सुरक्षित किया जाना आवश्यक है। उप-वनमंडलाधिकारियों और परिक्षेत्र अधिकारियों की निगरानी में इन कुओं के चारों ओर मजबूत दीवारें बनाई जा रही हैं तथा लोहे की ग्रिल लगाई जा रही है, ताकि वन्यजीव दुर्घटनाओं से बच सकें।
वन विभाग का कहना है कि इस पहल से केवल वन्यजीवों को ही नहीं, बल्कि ग्रामीणों, बच्चों और मवेशियों को भी सुरक्षा मिलेगी। इससे दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित वातावरण का निर्माण होगा।
श्री उत्तम कुमार गुप्ता ने कहा कि वन्यजीव प्राकृतिक पारिस्थितिकी के अभिन्न अंग हैं और उनकी सुरक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि चिन्हित 29 संवेदनशील कुओं को सुरक्षित बनाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों, वन प्रबंधन समितियों और आम नागरिकों से अभियान में सहयोग की अपील की।
वन विभाग ने नागरिकों से आग्रह किया है कि यदि उनके क्षेत्र में कोई खुला या असुरक्षित कुआं हो तो इसकी सूचना निकटतम वन परिक्षेत्र कार्यालय को दें, ताकि आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जा सकें और बस्तर की जैव विविधता के संरक्षण में सामूहिक भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
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