जगदलपुर , जुलाई 27 -- छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग को मलेरिया मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभियान का 14वां चरण चलाया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद संक्रमण पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं पाया जा सका है। इस साल जनवरी से अब तक बस्तर संभाग में 8426 लोग मलेरिया से पीड़ित हो चुके हैं।

मलेरिया के बढ़ते मामलों के बीच कांकेर जिले से चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। जिले के मर्दापोटी बालक आश्रम में पढ़ने वाले चौथी कक्षा के छात्र सुभाष कुमेटी (9) की रविवार सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई। पिछले दो दिनों में जिले में मलेरिया से दो बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि बीते 10 दिनों में यह तीसरी मौत है। तीनों मृतक स्कूली छात्र हैं।

जानकारी के मुताबिक, मर्दापोटी बालक आश्रम में 22 से 24 जुलाई के बीच हुई स्वास्थ्य जांच में 9 छात्र मलेरिया पॉजिटिव पाए गए थे। इनमें तामेश्वर भास्कर (7) और विक्रम मंडावी (8) की हालत गंभीर होने पर उन्हें रायपुर रेफर किया गया है। वहीं नवीन कुमेटी का इलाज एमसीएच अलबेलापारा में जारी है।

सुभाष कुमेटी की तबीयत बिगड़ने के बाद परिजन उसे पहले अस्पताल ले जाने के बजाय गांव में झाड़-फूंक कराने ले गए। हालत ज्यादा गंभीर होने पर दोपहर करीब 3:30 बजे उसे अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। लगातार हो रही मौतों के बाद सहायक आयुक्त जया मनु और जिला स्वास्थ्य अधिकारी की टीम आश्रम पहुंची और बच्चों का दोबारा स्वास्थ्य परीक्षण कराया।

मलेरिया नियंत्रण अभियान के बीच सबसे अहम बचाव साधन मेडिकेटेड मच्छरदानी की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बस्तर क्षेत्र में वर्ष 2024 से अब तक मेडिकेटेड मच्छरदानियों का वितरण नहीं हुआ है।

पहले बस्तर संभाग में हर साल औसतन 17 लाख मेडिकेटेड मच्छरदानियां वितरित की जाती थीं। तीन साल के रोटेशन के आधार पर भी हर वर्ष किसी न किसी जिले को इसकी आपूर्ति मिलती थी, लेकिन पिछले दो वर्षों से यह व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित है।

स्वास्थ्य विभाग को केंद्र सरकार से बजट स्वीकृत होने के बावजूद अब तक खरीदी प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। वहीं मलेरिया प्रभावित गांवों में कितनी मच्छरदानियों की आवश्यकता है, इसका सर्वे भी पूरा नहीं हुआ है।

जानकारों के अनुसार, मानसून के दौरान जुलाई से दिसंबर तक बस्तर में मलेरिया का प्रकोप सबसे अधिक रहता है। ऐसे में टेंडर, खरीदी और वितरण की प्रक्रिया पूरी होने में तीन से चार महीने लग सकते हैं। इससे आशंका है कि मौजूदा मलेरिया सीजन में भी प्रभावित क्षेत्रों तक मेडिकेटेड मच्छरदानियां नहीं पहुंच पाएंगी जबकि स्वास्थ्य विभाग ये दावा कर रहा है कि, मरीजों की संख्या मे निरंतर कमी आ रही है।

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