रायपुर , अगस्त 11 -- छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में मलेरिया के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का असर अब धरातल पर दिखाई देने लगा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पिछले 10 वर्षों में संभाग में मलेरिया के मामलों में करीब 83 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। बीमारी की रोकथाम के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के व्यवहार में बदलाव को भी अभियान का प्रमुख हिस्सा बनाया गया है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा मंगलवार को मिली जानकारी के अनुसार वहां मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में मच्छरदानी के नियमित इस्तेमाल, बुखार होने पर तत्काल जांच और समय पर उपचार के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। जंगलों और दूरस्थ क्षेत्रों में बसे गांवों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के साथ स्थानीय भाषा और समुदाय में प्रभाव रखने वाले लोगों को भी जागरूकता अभियान से जोड़ा गया है।

जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग ने स्थानीय स्तर पर प्रभाव रखने वाले बैगा, गुनिया और सिरहा को भी मलेरिया से बचाव की जानकारी देने के अभियान से जोड़ा है। इसके लिए बैगा-गुनिया सिरहा सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। इन सम्मेलनों के माध्यम से स्थानीय भाषा और संवाद शैली में ग्रामीणों को मलेरिया से बचाव के उपायों की जानकारी दी जा रही है।

ग्रामीणों को बताया जा रहा है कि बुखार को सामान्य मानकर घर पर इंतजार करने के बजाय तत्काल जांच कराना जरूरी है। समय पर जांच से मलेरिया की पहचान होने पर उपचार भी जल्द शुरू किया जा सकता है। इसके अलावा सोते समय मच्छरदानी का नियमित इस्तेमाल मलेरिया से बचाव का महत्वपूर्ण उपाय बताया जा रहा है।

मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और मितानिनों के माध्यम से परिवारों से संपर्क कर मच्छरदानी के नियमित इस्तेमाल को लेकर भी जागरूकता बढ़ाई जा रही है। स्वास्थ्य कार्यकर्ता यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि मच्छरदानी केवल घर में उपलब्ध न हो, बल्कि उसका नियमित रूप से उपयोग भी किया जाए।

वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में बुखार की निगरानी और जांच व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को बुखार आने पर घरेलू उपचार पर निर्भर रहने के बजाय स्वास्थ्य कार्यकर्ता से संपर्क कर जांच कराने की सलाह दी जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग का जोर अब मलेरिया के उपचार के साथ-साथ बीमारी की रोकथाम और ग्रामीणों की दिनचर्या में सुरक्षित व्यवहार को स्थायी रूप से शामिल करने पर है। विभाग का मानना है कि समुदाय की भागीदारी से मलेरिया के मामलों में और कमी लाई जा सकती है।

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