जगदलपुर , अक्टूबर 05 -- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोमवार को कहा कि लंबे समय तक नक्सल हिंसा का दंश झेलने वाला बस्तर अब शांति, विश्वास और विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है तथा सरकार दिव्यांगजनों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है।

श्री साय ने यहां धरमपुरा क्रीड़ा परिसर में आयोजित तीन दिवसीय निःशुल्क दिव्यांगजन सहायता एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर का वर्चुअल माध्यम से शुभारंभ करते हुए यह बात कही। 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत आयोजित शिविर में बस्तर, कोंडागांव, नारायणपुर और कांकेर जिले के 3,800 से अधिक जरूरतमंदों का पंजीयन किया गया है। शिविर में नक्सली विस्फोटों, सड़क दुर्घटनाओं और अन्य कारणों से अंग गंवा चुके लोगों को कृत्रिम अंग तथा सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

कार्यक्रम में मौजूद उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलवाद का खात्मा केवल सुरक्षा बलों की कार्रवाई तक सीमित नहीं है। बारूदी सुरंग और आईईडी विस्फोटों में अपने अंग गंवाने वाले लोगों को पुनः संबल देकर आत्मनिर्भर बनाना भी नक्सलवाद की अंतिम निशानियों को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने आईईडी विस्फोट के शिकार ग्रामीण संतोष पोयाम तथा कर्तव्य के दौरान घायल पुलिस जवान राकेश कुमार यादव और घासीराम मांझी का उल्लेख करते हुए कहा कि कृत्रिम अंगों की मदद से वे अब बिना किसी सहारे के चलने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

इस अवसर पर बस्तर सांसद महेश कश्यप, चित्रकोट विधायक विनायक गोयल सहित जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

इस बीच गृहमंत्री विजय शर्मा ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज के गरबा को लेकर दिए गए बयान का समर्थन किया। डॉ. राज ने नवरात्रि के दौरान आयोजित होने वाले गरबा कार्यक्रमों में मुस्लिम युवकों के नहीं जाने की बात कही थी।

श्री शर्मा ने कहा कि वह डॉ. राज के बयान का पूरी तरह समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि नवरात्रि के दौरान होने वाले आयोजन केवल मनोरंजन के कार्यक्रम नहीं, बल्कि भक्ति और आराधना से जुड़े आयोजन हैं। उन्होंने गरबा आयोजकों से भी आयोजन के संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करने की अपील की।

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