बीजापुर , जनवरी 21 -- छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की सदियों पुरानी लोक परंपराओं और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समर्पित वार्षिक महोत्सव 'बस्तर पंडुम' का आयोजन इस वर्ष अत्यंत हर्षोल्लास और सामुदायिक भावना के साथ संपन्न हुआ। जिला मुख्यालय में आयोजित इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र की 12 विशिष्ट लोक कला विधाओं गोंचा परंपरा, लोक नाट्य (दशहरा), पारंपरिक बांस शिल्प, धातु शिल्प, ढोकरा कला, लौह शिल्प, बांसुरी वादन और आदिवासी भित्ति चित्रकला आदि का संरक्षण, संवर्धन एवं प्रदर्शन करना था।

इन विविध विधाओं के कलाकारों ने तीन दिवसीय इस आयोजन में अपनी प्रतिभा का ऐसा जादू बिखेरा कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। प्रत्येक विधा के लिए अलग-अलग मंच स्थल एवं प्रदर्शनी क्षेत्र बनाए गए थे, जहाँ कलाकारों ने न केवल अपनी कला का प्रदर्शन किया बल्कि युवा पीढ़ी को उसकी बारीकियाँ भी सिखाईं। इससे परंपरा के हस्तांतरण को एक संरचित मंच मिला।

आयोजन की एक महत्वपूर्ण विशेषता सभी प्रतिभागियों एवं आगंतुकों के लिए भोजन की समुचित एवं समयबद्ध व्यवस्था रही। इस अवसर पर कलेक्टर संबित मिश्रा एवं पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र यादव ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर प्रतिभागी कलाकारों और ग्रामीण नागरिकों के साथ सामूहिक भोजन किया। प्रशासन के इस संवेदनशील कदम ने आपसी भाईचारे, समानता और सीधे संवाद का प्रेरणादायक वातावरण बनाया। यह दृश्य उत्सव के मूल भाव 'समरसता' को साकार करता प्रतीत हुआ।

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