जगदलपुर , अक्टूबर 10 -- छत्तीसगढ़ के बस्तर में विश्वप्रसिद्ध ऐतिहासिक दशहरा पर्व की महत्वपूर्ण पारंपरिक रस्म 'काछनगादी' का आयोजन शनिवार को किया जाएगा। इस दौरान 11 वर्षीय बालिका पीहू दास पर देवी काछन के आरूढ़ होने की धार्मिक मान्यता के बीच बेल के कांटों से निर्मित विशेष झूले पर देवी से बस्तर दशहरा के निर्विघ्न एवं सफल आयोजन की अनुमति मांगी जाएगी।
बस्तर की सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार राजपरिवार के सदस्य एवं माटी पुजारी कमलचंद भंजदेव अपने सहयोगियों के साथ आज काछनगुड़ी पहुंचेंगे। यहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद देवी काछन से दशहरा पर्व के आयोजन की अनुमति लेने की रस्म पूरी की जाएगी। इस अनुष्ठान को बस्तर दशहरा की प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं में शामिल माना जाता है।
काछनगादी अनुष्ठान की विशेष पहचान बेल के कांटों से तैयार किया जाने वाला झूला है। इसे बनाने की जिम्मेदारी जगदलपुर के लामनी स्कूलपारा निवासी जगत राम नेताम के परिवार के पास है। परिवार के सदस्य जयराम नेताम के अनुसार, उनका परिवार पिछली 22 पीढ़ियों से इस परंपरा का निर्वहन करता आ रहा है। इस वर्ष भी परिवार ने झूला तैयार करने की जिम्मेदारी संभाली है, जिसे आज परंपरागत विधि से काछनगुड़ी पहुंचाया जाएगा।
इस बार काछन देवी के स्वरूप में बैलाबाजार पारा निवासी 11 वर्षीय पीहू दास अनुष्ठान में शामिल होंगी। विद्या ज्योति स्कूल में पांचवीं कक्षा की छात्रा पीहू बेल के कांटों से बने झूले पर विराजमान होंगी। स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार, अनुष्ठान के दौरान बालिका पर देवी काछन का आवेश होता है और देवी की अनुमति मिलने के बाद दशहरा के आगामी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं।
काछनगादी के दौरान देवी काछन की बहन रैला देवी के स्वरूप में बालिका गुनगुन की भी विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी। इस अवसर पर बस्तर राजपरिवार के सदस्यों, पारंपरिक पुजारियों और स्थानीय श्रद्धालुओं की उपस्थिति रहेगी।
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