जगदलपुर , अक्टूबर 19 -- विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व की ऐतिहासिक एवं पारंपरिक रस्म मुरिया दरबार का आयोजन 23 अक्टूबर को जगदलपुर के सिरहासार भवन में ही किया जाएगा। बस्तर दशहरा समिति एवं प्रशासन ने आयोजन स्थल में बदलाव और मुरिया दरबार का नाम बदले जाने संबंधी चर्चाओं को निराधार बताते हुए स्पष्ट किया है कि इस वर्ष भी यह परंपरागत आयोजन अपने ऐतिहासिक स्वरूप और निर्धारित स्थल पर ही संपन्न होगा।
मुरिया दरबार बस्तर दशहरा की महत्वपूर्ण सामाजिक-सांस्कृतिक परंपरा है। यह बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और पारंपरिक संवाद व्यवस्था का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष 23 अक्टूबर को आयोजित होने वाले मुरिया दरबार में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के शामिल होने का कार्यक्रम है। राष्ट्रपति की उपस्थिति से बस्तर की जनजातीय विरासत और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
बस्तर दशहरा समिति ने आज स्पष्ट किया है कि मुरिया दरबार का नाम बदलने संबंधी खबरों में कोई तथ्य नहीं है। समिति की ओर से वितरित किए जा रहे निमंत्रण पत्रों में भी आयोजन का नाम 'मुरिया दरबार' ही अंकित है। ऐसे में नाम परिवर्तन की चर्चाएं महज अफवाह हैं। समिति ने आमजन से अपील की है कि वे इस संबंध में प्रसारित हो रही अपुष्ट खबरों पर ध्यान न दें।
वहीं, बस्तर दशहरा के अवसर पर आम जनता और आगंतुकों की सुविधा के लिए लालबाग मैदान में प्रदर्शनी एवं आमसभा का आयोजन किया जाएगा। समिति के अनुसार, दोनों आयोजनों को अलग-अलग स्थानों पर निर्धारित स्वरूप में संपन्न कराने की व्यवस्था की गई है, ताकि पारंपरिक मुरिया दरबार की गरिमा बनी रहे और आमसभा एवं प्रदर्शनी में शामिल होने वाले लोगों को भी सुविधा मिल सके।
मुरिया दरबार में राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री अरुण साव एवं विजय शर्मा, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल सहित प्रदेश के अन्य जनप्रतिनिधियों, बस्तर सांसद, जगदलपुर विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, जगदलपुर महापौर, वरिष्ठ अधिकारियों, बस्तर दशहरा समिति के सदस्यों तथा मांझी-चालाकी और अन्य पारंपरिक पदाधिकारियों के शामिल होने की संभावना है।
बस्तर दशहरा अपनी विशिष्ट जनजातीय परंपराओं और ऐतिहासिक आयोजनों के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। मुरिया दरबार इस पर्व का ऐसा महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां क्षेत्र की सामाजिक परंपराओं और जनसंवाद की ऐतिहासिक व्यवस्था की झलक देखने को मिलती है। इस वर्ष राष्ट्रपति की प्रस्तावित उपस्थिति से आयोजन का महत्व और बढ़ गया है।
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