जगदलपुर , अक्टूबर 25 -- छत्तीसगढ़ में बस्तर दशहरा के अंतिम चरण में आज गांधी स्कूल परिसर में कुटुंब जात्रा का आयोजन किया गया। इस दौरान गांव-गांव से आए देवी-देवताओं के छत्र और डोलियों की पूजा-अर्चना कर पारंपरिक रस्मों के साथ विदाई दी गई। आयोजन बस्तर महाराजा कमलचंद्र भंजदेव की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
75 दिनों तक चलने वाला बस्तर दशहरा अपनी विशिष्ट धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। इस महापर्व में बस्तर के विभिन्न गांवों से देवी-देवताओं के छत्र और डोलियां अपने पुजारियों तथा पारंपरिक सेवकों के साथ जगदलपुर पहुंचते हैं। इनकी सहभागिता से यह आयोजन पूरे अंचल की आस्था, परंपरा और सामुदायिक एकता का प्रतीक बनता है।
कुटुंब जात्रा इस परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें आमंत्रित देवी-देवताओं को कुटुंब का सदस्य मानकर पूजा-अर्चना की जाती है। इस दौरान उनके प्रतिनिधियों और पुजारियों को पारंपरिक रुसूम के तहत भेंट देकर सम्मानित किया जाता है। परंपरा के अनुसार, इन भेंटों में वस्त्र, धनराशि और मिठाइयां शामिल होती हैं।
पूजा-अर्चना और सम्मान की रस्में पूरी होने के बाद देवी-देवताओं के छत्र और डोलियों को उनके गांवों के लिए विदा किया जाता है। यह परंपरा बस्तर की उस सांस्कृतिक भावना को दर्शाती है, जिसमें अतिथियों के स्वागत के साथ उनकी विदाई भी पूरे सम्मान और आत्मीयता से की जाती है।
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