रायपुर , अक्टूबर 30 -- छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के दूरस्थ और नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों में सड़क संपर्क के विस्तार की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। संभाग की 485 बसाहटों को सड़क मार्ग से जोड़ने के कार्यों को स्वीकृति मिल चुकी है। इसके अतिरिक्त 280 बसाहटों के लिए 804.06 करोड़ रुपये की लागत से 263 सड़क निर्माण कार्यों के प्रस्ताव केंद्र सरकार को प्राप्त हुए हैं।

राज्य सरकार की ओर से शुक्रवार को जारी जानकारी के अनुसार उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने बस्तर की भौगोलिक परिस्थितियों और नक्सलवाद से मुक्त हुए गांवों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की आवश्यकता को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा था। इसके जवाब में श्री चौहान ने सड़क एवं पुल निर्माण से संबंधित प्रस्तावों की प्रगति और विशेष छूट के अनुरोध पर की जा रही कार्रवाई की जानकारी दी है।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री के अनुसार, बस्तर संभाग की 1,168 बसाहटों से संबंधित सड़क संपर्क के कार्य विभिन्न चरणों में हैं। इनमें 485 बसाहटों के लिए कार्य स्वीकृत किए जा चुके हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के चौथे चरण के दूसरे बैच के अंतर्गत 280 बसाहटों को जोड़ने के लिए प्रस्तावित 263 सड़कों की कुल लंबाई 841.825 किलोमीटर है। इनकी अनुमानित लागत 804.06 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। इसके अलावा लगभग 474 अन्य चिह्नित बसाहटों के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार किए जा रहे हैं।

पीएमजीएसवाई के चौथे चरण के पहले बैच में बस्तर संभाग की 234 बसाहटों के सड़क निर्माण कार्यों को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें बस्तर जिले की 87, बीजापुर की 44, दंतेवाड़ा की 12, कांकेर की 41, कोण्डागांव की 34 और सुकमा जिले की 16 बसाहटें शामिल हैं। वहीं, दूसरे बैच के अंतर्गत सातों जिलों की कुल 755 बसाहटों को सड़क संपर्क से जोड़ने के प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। इनमें बस्तर की 114, बीजापुर की 125, दंतेवाड़ा की 63, कांकेर की 140, कोण्डागांव की 31, नारायणपुर की 136 और सुकमा की 146 बसाहटें शामिल हैं। इन क्षेत्रों में ग्रामीण सड़क सर्वे ऐप के माध्यम से सर्वेक्षण तथा प्रस्तावों को गति शक्ति योजना से जोड़ने की प्रक्रिया जारी है।

सड़क निर्माण के साथ ही बस्तर में पुलों के निर्माण की दिशा में भी कार्रवाई की जा रही है। केंद्रीय मंत्री चौहान ने बताया कि पीएमजीएसवाई-4 के पहले बैच के अंतर्गत 206 और पीएम-जनमन योजना के तहत 167 पुलों सहित कुल 373 प्रस्तावों पर अधिकार प्राप्त समिति की बैठक में विचार किया गया है। इन प्रस्तावों को शीघ्र स्वीकृति दिए जाने की बात कही गई है।

इसके अतिरिक्त बस्तर संभाग में 55 लंबे पुलों के निर्माण के प्रस्ताव भी तैयार किए गए हैं। नारायणपुर जिले में पीएम-जनमन योजना के अंतर्गत 22 लंबे पुल प्रस्तावित हैं, जिनकी अनुमानित लागत 87.45 करोड़ रुपये है। इन परियोजनाओं से विशेष रूप से वर्षा ऋतु में नदी-नालों के कारण मुख्य मार्गों से कट जाने वाले गांवों को आवागमन की सुविधा मिलने की उम्मीद है।

उप मुख्यमंत्री ने बस्तर के कम आबादी वाले गांवों के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के निर्धारित मापदंडों में विशेष छूट देने का आग्रह भी किया है। उन्होंने अपने पत्र में उल्लेख किया कि घने जंगलों और दुर्गम इलाकों में कई बसाहटों की जनसंख्या 100 से भी कम है। निर्धारित जनसंख्या संबंधी शर्तों के कारण ऐसी बसाहटें सड़क निर्माण की पात्रता से वंचित रह जाती हैं।

श्री शर्मा ने निर्धारित क्लस्टर की जनसंख्या गणना में छूट देने और 10 किलोमीटर की परिधि में स्थित छोटी बसाहटों को एक क्लस्टर मानकर सड़क निर्माण की स्वीकृति प्रदान करने का अनुरोध किया है।

इस संबंध में श्री चौहान ने जानकारी दी है कि बस्तर की शेष पात्र बसाहटों की पहचान और सड़क संपर्क की आवश्यकताओं का आकलन करने के लिए ग्राम सड़क सर्वेक्षण (जीएसएस) ऐप के माध्यम से चार माह का सर्वेक्षण शुरू किया गया है। क्लस्टर आधारित व्यवस्था और विशेष छूट के प्रस्तावों का परीक्षण प्राप्त तथ्यों तथा लागू दिशा-निर्देशों के आधार पर किया जाएगा।

उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि नक्सलवाद के प्रभाव में कमी आने के बाद बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार का उद्देश्य ऐसे गांवों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, संचार और रोजगार की सुविधाएं पहुंचाना है, जो लंबे समय तक कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के कारण बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सड़क संपर्क का विस्तार होने से ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाओं, विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों और बाजारों तक पहुंचने में सुविधा होगी। किसानों के लिए कृषि उपज का परिवहन आसान होने के साथ स्थानीय व्यापार और आजीविका के अवसर भी बढ़ेंगे।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित