बलरामपुर/रामानुजगंज , मार्च 10 -- छत्तीसगढ में दुर्ग जिले में अवैध अफीम की खेती का मामला सामने आने के बाद अब बलरामपुर जिले के कुसमी थाना क्षेत्र में भी इसी तरह की खेती का खुलासा हुआ है। त्रिपुरी गांव के पहाड़ी इलाके में लगभग दो एकड़ भूमि पर अफीम की खेती किए जाने की सूचना मिलने के बाद पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
एसडीएम अनमोल टोप्पो से मिली जानकारी के अनुसार, अफीम की खेती आबादी से दूर एक दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में की जा रही थी। सूचना मिलने के बाद प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ और पुलिस तथा राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर खेतों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने क्षेत्र में मौजूद फसलों और उससे जुड़े साक्ष्यों को अपने कब्जे में लेकर कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
एसडीएम अनमोल टोप्पो ने बताया कि प्रशासन को पहाड़ी इलाके में अफीम की खेती होने की सूचना प्राप्त हुई थी। इसके बाद पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम को मौके पर भेजा गया। टीम द्वारा खेतों का निरीक्षण किया जा रहा है और पूरे मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।
मौके पर लिए गए वीडियो और तस्वीरों में देखा गया है कि अफीम के पौधों के साथ-साथ फलों को तोड़कर पॉलीथिन में सुखाया जा रहा था।खेत के आसपास हरे-भरे अफीम के पौधे भी नजर आए, जिससे स्पष्ट है कि यहां व्यवस्थित तरीके से खेती की जा रही थी। कुसमी थाना के कई पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद रहकर जब्ती और अन्य कानूनी कार्रवाई में जुटे रहे।
इधर इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस के नेताओं ने इसे लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और विधायक भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बलरामपुर में जहां अफीम की खेती पकड़ी गई है, वहां के सरपंच ने जनवरी में ही पुलिस को इसकी सूचना दी थी, लेकिन उस समय कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सूखे नशे का नेटवर्क सरकार के संरक्षण में संचालित हो रहा है और इस मामले में जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
भूपेश बघेल ने यह भी आरोप लगाया कि दुर्ग जिले में सामने आए अफीम खेती प्रकरण में भी भाजपा से जुड़े लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने राज्य के गृहमंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि यदि सरकार नैतिकता के आधार पर काम कर रही है तो इस मामले में सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस के संचार विभाग प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने भी इस मामले में भाजपा नेताओं की संलिप्तता का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सरकार के संरक्षण के बिना इस तरह की अवैध खेती संभव नहीं है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि भारत में अफीम की खेती बिना वैध अनुमति के करना पूरी तरह प्रतिबंधित है और इसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि इस अवैध खेती के पीछे कौन लोग शामिल हैं और इसे किस स्तर पर संरक्षण मिल रहा था। फिलहाल पुलिस और राजस्व विभाग की टीम साक्ष्य जुटाने और संबंधित व्यक्तियों की पहचान करने में जुटी हुई है।
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