बरेली , अगस्त 26 -- बरेली में मिलिट्री इंटेलिजेंस और कैंट पुलिस ने अग्निवीर अभ्यर्थियों से ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा करते हुए सेना का फर्जी हवलदार बनकर घूम रहे एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है।
आरोपी अग्निवीर जनरल ड्यूटी के री-मेडिकल में फेल अभ्यर्थियों को पास कराने का झांसा देकर उनसे 40 हजार से एक लाख रुपये तक वसूलता था। पुलिस को उसके मोबाइल फोन से एक अभ्यर्थी द्वारा 40 हजार रुपये भेजे जाने का डिजिटल साक्ष्य मिला है। उसका साथी गजेंद्र सिंह फरार है।
पुलिस अधीक्षक नगर मानुष पारिक ने बताया कि कैंट थाना क्षेत्र में मिलिट्री अस्पताल के पास एक व्यक्ति के खुद को सेना का हवलदार बताकर अग्निवीर अभ्यर्थियों से रुपये ऐंठने की सूचना मिलिट्री इंटेलिजेंस को मिली थी। सूचना के आधार पर कैंट पुलिस और मिलिट्री इंटेलिजेंस की टीम ने घेराबंदी कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। उसकी पहचान लखनऊ के सैरपुर थाना क्षेत्र स्थित कृष्ण विहार कॉलोनी, आईआईएम रोड, मुबारकपुर निवासी राजेश तिवारी पुत्र राम सुख तिवारी के रूप में हुई है।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से फर्जी मोहर, फर्जी लेटर, मोबाइल फोन और अभ्यर्थियों की जानकारी वाला रजिस्टर बरामद किया है। रजिस्टर में दर्ज नामों और मोबाइल फोन में मिले दस्तावेजों की पुलिस जांच कर रही है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी के मोबाइल फोन की जांच में 21 अगस्त को अंकित सिंह चौहान नामक अभ्यर्थी की यूपीआई आईडी से राजेश तिवारी को 40 हजार रुपये भेजे जाने का डिजिटल साक्ष्य मिला। खास बात यह है कि अंकित सिंह चौहान का नाम आरोपी के पास बरामद रजिस्टर में भी दर्ज मिला है।
पूछताछ में सामने आया कि राजेश अभ्यर्थियों को री-मेडिकल में पास कराने के नाम पर 40 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक की रकम मांगता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उसके झांसे में कितने अभ्यर्थी आए और उनसे कुल कितनी रकम की ठगी की गई।
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह पहले जबलपुर में सेना भर्ती की तैयारी कराने वाली अकादमी चलाता था। इसी दौरान उसकी मुलाकात गजेंद्र सिंह से हुई। पुलिस की जांच के मुताबिक, दोनों ने अभ्यर्थियों को सेना में भर्ती कराने और री-मेडिकल में पास कराने का झांसा देकर रकम वसूलने की योजना बनाई।
आरोपी फर्जी दस्तावेज और कॉल लेटर दिखाकर अभ्यर्थियों का विश्वास हासिल करता था। इसके बाद री-मेडिकल में फेल अभ्यर्थियों को पास कराने का भरोसा देकर उनसे रकम मांगी जाती थी। राजेश तिवारी के मोबाइल फोन की जांच में पुलिस को गजेंद्र सिंह के नाम से वाट्सऐप चैट भी मिली है। इसमें अभ्यर्थियों के रेफरल फॉर्म और रुपये के लेनदेन से जुड़ी बातचीत सामने आई है।
पुलिस के अनुसार, राजेश अभ्यर्थियों से संबंधित जानकारी वाट्सऐप के माध्यम से गजेंद्र सिंह को भेजता था। रकम मिलने के बाद उसका कुछ हिस्सा अपने पास रखकर शेष रकम बताए गए खाते में भेजने की बात भी जांच में सामने आई है। पुलिस अब चैट और डिजिटल लेनदेन के आधार पर गिरोह के नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।
पुलिस के मुताबिक, राजेश तिवारी 25 अगस्त को भी मिलिट्री अस्पताल के पास नए अभ्यर्थियों की तलाश में पहुंचा था। इसी दौरान मिलिट्री इंटेलिजेंस को मिली सूचना के आधार पर कैंट पुलिस के साथ टीम ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब उसके फरार साथी गजेंद्र सिंह की तलाश कर रही है। बरामद मोबाइल फोन, वाट्सऐप चैट, रजिस्टर, फर्जी दस्तावेज और डिजिटल लेनदेन को जांच का आधार बनाकर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने अब तक कितने अग्निवीर अभ्यर्थियों को अपने जाल में फंसाया है और उनसे कितनी रकम वसूली गई है। साथ ही ठगी के शिकार अभ्यर्थियों की पहचान कर उनके बयान दर्ज किए जाने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
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