रायपुर , जून 25 -- छत्तीसगढ़ सरकार ने भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के वरिष्ठ अधिकारी बद्रीनारायण मीणा को बस्तर क्षेत्र का नया पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) नियुक्त किया है। गृह (पुलिस) विभाग द्वारा गुरुवार को जारी आदेश के अनुसार, पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर में पुलिस महानिरीक्षक के पद पर पदस्थ मीणा को आगामी आदेश तक पुलिस महानिरीक्षक, बस्तर रेंज, जगदलपुर के पद पर पदस्थ किया गया है।

सरकारी आदेश के बाद श्री मीणा बस्तर क्षेत्र की कानून-व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था तथा पुलिस प्रशासन की कमान संभालेंगे। नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण बस्तर रेंज में आईजी का पद सुरक्षा दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

राजस्थान मूल निवासी श्री मीणा ने वर्ष 2003 की संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) परीक्षा उत्तीर्ण की थी और वर्ष 2004 बैच के आईपीएस अधिकारी के रूप में छत्तीसगढ़ कैडर आवंटित हुआ। वह 27 दिसंबर 2004 को सेवा शामिल हुए। श्री मीणा ने पुलिस करियर में वे बिलासपुर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के अलावा बिलासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी (एसएसपी) और आईजी भी रह चुके हैं।

कम्युनिटी पुलिसिंग के लिए पहचान रखने वाले श्री मीणा नौ जिलों में एसपी और एसएसपी की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उनकी पहली जिला पदस्थापना बलरामपुर-रामानुजगंज के पुलिस अधीक्षक के रूप में हुई थी। इसके बाद उन्होंने कवर्धा, राजनांदगांव, जगदलपुर, कोरबा, बिलासपुर, रायपुर, रायगढ़ और दुर्ग में एसपी एवं एसएसपी के रूप में सेवाएं दीं।

डीआईजी पद पर पदोन्नति के बाद वर्ष 2018 में वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर खुफिया ब्यूरो (आईबी) गए। वहां से लौटने के बाद उन्होंने दुर्ग के एसएसपी, दुर्ग क्षेत्र के आईजी तथा अतिरिक्त प्रभार के रूप में रायपुर रेंज के आईजी की जिम्मेदारी निभाई। बाद में वे बिलासपुर रेंज के आईजी रहे और पुनः दुर्ग रेंज के आईजी नियुक्त हुए। वर्तमान में वे पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर में पदस्थ थे।

बस्तर क्षेत्र में यह नियुक्ति वर्ष 2003 बैच के आईपीएस अधिकारी सुंदरराज पी के राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) में महानिरीक्षक (आईजी) नियुक्त होने के बाद की गई है। श्री सुंदरराज पी लंबे समय तक बस्तर रेंज के आईजी रहे और उन्हें छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियानों का प्रमुख चेहरा माना जाता है। उनके कार्यकाल में सुरक्षा बलों ने बस्तर के दुर्गम और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार अभियान संचालित किए, जिससे माओवादी संगठन को बड़ा नुकसान पहुंचा। उन्होंने खुफिया तंत्र को मजबूत करने, स्थानीय युवाओं की भागीदारी बढ़ाने, नए सुरक्षा कैंप स्थापित करने तथा सड़क एवं विकास कार्यों को गति देने पर विशेष जोर दिया। अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की पहुंच बढ़ाने और बड़ी संख्या में नक्सलियों के आत्मसमर्पण में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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