चंडीगढ़ , अगस्त 22 -- पंजाब भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष परमजीत सिंह कैंथ ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित महंगाई भत्ते (डीए/डीआर) को लेकर भगवंत मान सरकार पर तीखा हमला बोला है।
श्री कैंथ ने शनिवार को कहा कि सरकारी कार्यालयों, अस्पतालों, स्कूलों और प्रशासनिक व्यवस्था को चलाने वाले कर्मचारियों के वैध डीए का भुगतान करने के लिए सरकार खजाना खाली होने का हवाला देती है, लेकिन सरकार की उपलब्धियों को प्रचारित करने वाले विज्ञापनों और राजनीतिक प्रचार पर खर्च करने के लिए कथित तौर पर धन की कोई कमी नहीं है। इससे सरकार की कर्मचारी विरोधी सोच उजागर होती है।
उन्होंने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने आठ अप्रैल 2026 को पंजाब सरकार को लंबित डीए/डीआर की किस्तें जारी करने का निर्देश दिया था। इसके बाद तीन अगस्त 2026 को डिवीजन बेंच ने सरकार की अपीलें खारिज करते हुए लंबित डीए/ डीआर 14 दिनों के भीतर जारी करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि लंबित राशि का भुगतान होने तक सरकार को बड़े पैमाने पर विज्ञापन जैसे गैर-उत्पादक खर्चों से बचना चाहिए।
श्री कैंथ ने कहा कि वित्तीय संकट का हवाला देकर कर्मचारियों के वैध बकाये को बार-बार टालना स्वीकार्य नहीं है। मई 2026 में सामने आयी रिपोर्टों के अनुसार पंजाब सरकार पर लंबित डीए की देनदारी करीब 15,000 करोड़ रुपये आंकी गयी थी। उन्होंने कहा कि डीए सरकार की कोई मेहरबानी नहीं, बल्कि कर्मचारियों का अधिकार है। बढ़ती महंगाई के दौर में महंगाई भत्ता कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ है। लंबित किस्तों का भुगतान न करना सरकारकी वित्तीय विफलता और प्रशासनिक संवेदनहीनता को दर्शाता है।
श्री कैंथ ने कहा कि यदि सरकार के पास कर्मचारियों के लंबित बकाये का भुगतान करने के लिए धन नहीं है तो उसे पंजाब की जनता को बताना चाहिए कि विज्ञापनों, राजनीतिक कार्यक्रमों और सरकारी प्रचार पर कितना पैसा खर्च किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को अपने वैध अधिकारों के लिए सरकार के दरवाजे खटखटाने पड़ रहे हैं, जो भगवंत मान सरकार के 'बदलाव' के दावों की वास्तविकता को सामने लाता है। उन्होंने मांग की कि सरकार अदालत के निर्देशों और कर्मचारियों की जायज मांगों को गंभीरता से लेते हुए लंबित डीए/डीआर की पूरी राशि तुरंत जारी करे। सरकार को बहाने बनाने के बजाय स्पष्ट समयसीमा घोषित करनी चाहिए कि लंबित डीए की प्रत्येक किस्त किस तारीख तक कर्मचारियों और पेंशनरों के खातों में जमा की जाएगी।
श्री कैंथ ने भगवंत मान सरकार से सवाल किया, " क्या कर्मचारियों को डीए देने के लिए खजाना खाली है या सरकार की प्राथमिकताएं ही गलत हैं? यदि पंजाब के कर्मचारियों के लिए पैसा नहीं है तो सरकारी प्रचार और विज्ञापनों के लिए पैसा कहां से आ रहा है?"उन्होंने कहा कि पंजाब के कर्मचारी और पेंशनर सरकारी बयान नहीं, बल्कि अपने अधिकार की राशि अपने खातों में जमा होते देखना चाहते हैं। भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा पंजाब कर्मचारियों और पेंशनरों के वैध अधिकारों का मुद्दा और मजबूती से उठाएगा तथा भगवंत मान सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए इसे जनता के बीच ले जाएगा।
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