लखनऊ , मार्च 05 -- बदलते मौसम के दौरान लापरवाही बच्चों की सेहत पर भारी पड़ सकती है। खानपान में गड़बड़ी और साफ-सफाई की अनदेखी के कारण बच्चों में डायरिया और निमोनिया के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों में इन बीमारियों के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच और उपचार कराएं।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के महाप्रबंधक डॉ. मिलिंद वर्धन ने बताया कि बदलते मौसम में छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है, जिससे दस्त और निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर ओआरएस और जिंक की दवाएं निःशुल्क उपलब्ध हैं। साथ ही बच्चों की जांच और उपचार की भी पर्याप्त व्यवस्था की गई है।

उन्होंने बताया कि यदि अभिभावक शुरुआती लक्षणों की पहचान कर तुरंत आशा, एएनएम या नजदीकी स्वास्थ्य इकाई से संपर्क करें तो बच्चे को गंभीर स्थिति में जाने से बचाया जा सकता है। समय पर ओआरएस घोल, जिंक की गोली और आवश्यक दवाओं से अधिकतर बच्चे जल्दी स्वस्थ हो जाते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में होने वाली मृत्यु के लगभग 15 से 20 प्रतिशत मामले डायरिया और निमोनिया से जुड़े होते हैं। ओआरएस और जिंक से डायरिया के 90 प्रतिशत से अधिक मामलों का सफल उपचार संभव है, जबकि निमोनिया की शीघ्र पहचान से गंभीर जटिलताओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

डॉ. मिलिंद वर्धन ने बताया कि दस्त होने पर बच्चे को तुरंत ओआरएस घोल देना शुरू करें और स्वास्थ्य कार्यकर्ता से संपर्क कर 14 दिन तक जिंक की गोली देना सुनिश्चित करें। बच्चे को बार-बार स्तनपान कराएं और पर्याप्त तरल पदार्थ दें। वहीं निमोनिया के लक्षण दिखने पर देरी किए बिना डॉक्टर से उपचार कराना जरूरी है।

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